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जम्मू-कश्मीर: वादे और मुद्दे

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नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने ख़राब मौसम के कारण चुनाव टालने की अपील की थी
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में 2008 के विधानसभा चुनावों में क्या मुद्दे उठा रहे हैं राजनीतिक मुख्यधारा के दल?

उधर कांग्रेस ने विकास, पारदर्शी प्रशासन और युवाओं की बेरोज़गारी के मुद्दे उठाए हैं. कांग्रेस का दावा है कि केंद्र से दिए जा रहे पैसे का उचित इस्तेमाल नहीं हो रहा. कांग्रेस ने ये भी माँग उठाई है कि राज्य में चुनाव राष्ट्रपति शासन के तहत होने चाहिए तभी वे स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे.

और भारतीय जनता पार्टी ने अनुच्छेद 370 पर ज़्यादा कुछ न कहते हुए जम्मू-कश्मीर के हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ कथित भेदभाव के मसले उठाए हैं. भारतीय जनता पार्टी ने लद्दाख़ के लिए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिन जाने की माँग उठाते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय विकास में कथित असंतुलन का मुद्दा सुलझाने की ज़रूरत है. बेरोज़गारी, युवाओं के लिए बेरोज़गारी भत्ता और महिलाओं के लिए विधानसभा में आरक्षण के मुद्दे भी भाजपा ने उठाए हैं.

चुनाव- 2002, कुल: 87 सीटें नेशनल कॉन्फ़्रेंस 28 कांग्रेस 20 पीडीपी 16 पैंथर्स पार्टी 4 भाजपा बसपा अन्य 17

बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार जुलाई-अगस्त में 'आज़ादी' के समर्थन में हुए प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाई के बाद अब अलगाववादी गुटों की चुनाव बहिष्कार की घोषणा के कारण कश्मीर घाटी में चुनाव प्रचार का ज़्यादा असर देखने को नहीं मिला है.

एनसी: बेरोज़गारी, आर्थिक विकास

पीडीपी ने नेशनल कॉन्फ़्रेंस पर आरोप लगाया है कि उसने ये चुनाव जनता पर थोपा है जबकि जनता इसके लिए तैयार नहीं है. लेकिन नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने कहा है कि उसने भी केंद्र से पीडीपी की तरह चुनाव स्थगित करने की सिफ़ारिश की थी.

नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने बेरोज़गारी का मुद्दा उठाने के साथ-साथ राज्य के सभी ज़िलों के विकास के लिए 'हिल डेवेलेपमेंट काउंसिल' बनाने की बात कही है. एनसी ने राज्य के आर्थिक विकास और बिजली संकट का मुद्दा उठाया है और अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों - कांग्रेस और पीडीपी को इसके लिए दोषी ठहराया है.

हमारे राज्य में पाँच लाख बेरोज़गार युवक हैं और हमें पहले उनकी समस्याओं का समाधान करना है
एनसी ने कहा है कि वह मानवाधिकारों का उल्लंघन बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी और मृतक चरमपंथियों के रिश्तेदारों की मदद करेगी. उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि सरकारी विभागों में रिक्त पड़े हज़ारों स्थानों को भरा जाएगा.

पार्टी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की है कि अगले चुनाव में नेशनल कॉन्फ़्रेंस के पेट्रन फ़ारूक़ अब्दुल्ला पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.

विज़न डॉक्यूमेंट

हम चुनाव राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर करने, बेरोज़गारी हटाने, बिजली का संकट हल करने, स्वच्छ पानी पहुँचाने और सुशासन प्रदान करने के मुद्दों पर लड़ रहे हैं
पार्टी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है -- "ये चुनाव कश्मीर समस्या का हल खोजने के लिए नहीं हो रहे बल्कि लोगों को सुशासन देने के लिए और उनके रोज़मर्रा के मुद्दे सुलझाने के लिए हो रहे हैं. हम चुनाव राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर करने, बेरोज़गारी हटाने, बिजली का संकट हल करने, स्वच्छ पानी पहुँचाने और सुशासन प्रदान करने के मुद्दों पर लड़ रहे हैं."

हालाँकि पार्टी ने अपने प्रचार में लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं लेकिन उसने अगले 15 साल का एक 'विज़न डॉक्यूमेंट' भी प्रस्तुत किया है.

विज़न डॉक्यूमेंट में पार्टी ने पार्टी के नेतृत्व में विधानसभा में पारित स्वायत्ता का प्रस्ताव, आर्थिक आत्मनिर्भरता, बेरोज़गारी हटाने, ऊर्जा संकट का समाधान निकालने, प्रशासन से भष्टाचार हटाने जैसे मुद्दों पर बल दिया है. विज़न डॉक्यूमेंट का कहना है -- "हमारे राज्य में पाँच लाख बेरोज़गार युवक हैं और हमें पहले उनकी समस्याओं का समाधान करना है."

पीडीपी: स्वशासन, संवैधानिक बदलाव

संविधान का अनुच्छेद 356 जम्मू-कश्मीर पर लागू न हो और अनुच्छेद 249 भी लागू न हो जिससे राज्य के कार्यक्षेत्र में आने वाले विषयों पर भारतीय संसद क़ानून न बना सके
वर्ष 2008 में हो रहे चुनावों में पीडीपी ने 'स्वशासन का नारा' लगाया है. पार्टी के मुताबिक स्वशासन के लिए भारतीय संविधान में व्यापक परिवर्तन की ज़रूरत है.

इन बदलावों में प्रमुख हैं - संविधान का अनुच्छेद 356 जम्मू-कश्मीर पर लागू न हो और अनुच्छेद 249 भी लागू न हो जिससे राज्य के कार्यक्षेत्र में आने वाले विषयों पर भारतीय संसद क़ानून न बना सके.

पीडीपी ये भी चाहती है कि संविधान में हुए छठे संशोधन को निरस्त किया जाए और स्वशासन के पहले स्वरूप को बहाल किया जाए जिसके तहत जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सदरे रियासत को चुनती थी. पीडीपी के अनुसार ये पद कश्मीर और जम्मू क्षेत्र को बारी-बारी से दिया जा सकता है.

इस तरह पीडीपी ने मौजूदा व्यवस्था की जगह सत्ता के विकेंद्रीकरण और 'ग्रेटर जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय परिषद' की बात की है जिसमें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रतिनिधि भी शामिल हों.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का ये भी कहना है कि नागरिक इलाक़ों से सुरक्षा बलों की वापसी हो और सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून वापस लिया जाए.

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