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धर्मशाला में तिब्बतियों का सम्मेलन

By क्रिस मौरिस
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दलाई लामा हज़ारों निर्वासित तिब्तियों के साथ धर्माशाला में रहते हैं
तिब्बत में चीनी शासन के ख़िलाफ़ अपनी भावी रणनीति तय करने के लिए निर्वासन में रह रहे क़रीब 500 तिब्बती धर्मशाला में इकट्ठा हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा पिछले कई वर्षों से अपने हज़ारों अनुयायियों के साथ भारत के धर्मशाला में रह रहे हैं.

इस वर्ष के शुरुआत में तिब्बत में चीनी शासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन और ओलंपिक मशाल को लेकर हुए विरोध ने तिब्बत की समस्या को एक बार फिर से दुनिया के सामने ला खड़ा किया है.

दलाई लामा कह चुके हैं कि चीनी शासन के साथ तिब्बत की स्वायत्ता की उनकी कोशिश बेमानी सी हो गई है.

अब दलाई लामा चाह रहे हैं कि चीनी शासन के साथ किस तरह की रणनीति निर्वासन में रह रहे तिब्बती अपनाएँ इसकी समीक्षा हो.

उम्मीद है कि इस सम्मेलन में दलाई लामा के 'मध्यम मार्ग' की समीक्षा होगी, साथ ही उनके उत्तराधिकारी पर भी बहस संभव है.

स्वायत्ता या स्वतंत्रता

धर्मशाला में इकट्ठा हुए कुछ प्रतिनिधि जहाँ तिब्बत की स्वायत्ता की अपनी माँग को दोहराएँगे वहीं कुछ लोग बहस करेंगे कि समय आ गया है अब तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की जाए.

दलाई लामा की बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए भविष्य की रणनीति की चर्चा करने को और भी बल मिला है.

हालांकि चीन का कहना है कि धर्मशाला में होने वाले इस सम्मेलन का कोई मतलब नहीं है और जो लोग वहाँ इकट्ठा है वे तिब्बत के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

लेकिन इस बार दलाई लामा ने बिना किसी पूर्वाग्रह के विभिन्न विचारों को सुनने का निश्चय किया है.

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