• search

ब्रिटेन के रूख़ का चीन में स्वागत

|
झू वेकन निर्वासित तिब्बतियों से बातचीत की अगुआई कर रहे हैं
ब्रिटेन ने तिब्बत पर चीन के प्रत्यक्ष शासन को मान्यता देने का फ़ैसला किया है. चीन सरकार ने ब्रिटेन के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के उपमंत्री झू वेकन ने बीबीसी से कहा कि इस क़दम ने ब्रिटेन को 'आज की दुनिया की सार्वभौमिक स्थिति' में ला दिया है. यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट तिब्बती प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में शामिल है.

लेकिन झू ने यह नहीं कहा कि क्या इसे प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के चीन को नवीन विश्व आर्थिक व्यवस्था में लाने के प्रयासों से जोड़ा जा सकता है? चीन कहता है कि तिब्बत 13वीं शताब्दी से उसका हिस्सा रहा है.

कई तिब्बती इससे असहमत हैं. वह कहते हैं कि यह हिमालय क्षेत्र कई शताब्दियों से आज़ाद राज्य रहा है और तिब्बत पर चीन का निरंतर शासन नहीं रहा.

बीसवीं शताब्दी की शुरूआत में चीन और तिब्बत के बीच सैन्य झड़पों के बाद वर्ष 1912 में तिब्बत ने स्वयं को एक स्वतंत्र गणराज्य घोषित कर दिया था.

इसके बाद वर्ष 1950 में चीन ने तिब्बत में अपने सैनिक भेजे और अगले वर्ष सम्प्रभुता संबंधी संधि पर दस्तख़त के लिए एक तिब्बती प्रतिनिधिमंडल को तलब किया.

'आपराधिक कृत्य'

इसके बाद से ही तिब्बत में अशांति का दौर रहा. अभी हाल ही में मार्च में तिब्बत और आसपास के प्रांतो में दंगे भड़के तथा प्रदर्शन हुए. तिब्बत की राजधानी ल्हासा में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष हुए

चीन की सरकार ने कहा कि दंगाईयों ने कम से कम 19 लोगों की हत्या की. लेकिन निर्वासित तिब्बतियों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने दर्जनों प्रदर्शनकारियों मार दिया और दमन किया. झू ने बीबीसी से कहा, '' मैं दमन की बात से सहमत नहीं हूँ. तिब्बती हमारे भाई-बहन हैं. ''

झू ने कहा, '' बीते मार्च में निर्दोष नागरिक घायल हुए या जलने से मारे गए. एक दुकान में पाँच लड़कियों को आग लगाकर मार दिया गया जिनमे एक लड़की तिब्बती थी. इस तरह की आपराधिक कार्रवाई से क़ानून के मुताबिक़ निपटा गया. क्या आप इसे दमन कहेंगे. ''

बीते सोमवार को निर्वासित तिब्बतियों और चीन के अधिकारियों के बीच हिमालय क्षेत्र के भविष्य के बारे में बातचीत किसी नतीज़े पर पहुँचे बिना समाप्त हुई.

उन्होंने इस गतिरोध के लिए झू ने तिब्बती प्रतिनिधियों को ज़िम्मेदार बताया. झू को लगता है कि तिब्बती प्रतिनिधि अब भी आज़ादी चाहते हैं.

तिब्बतियों ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन निर्वासित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के मुखिया दलाई लामा ने पहले कहा था कि वह तिब्बत के लिए आज़ादी नहीं चाहते, केवल अर्थपूर्ण स्वायत्तता चाहते हैं.

' घटनाक्रम ' चीन कहता रहा है कि तिब्बतियों का चीन विरोधी प्रदर्शन दलाई लामा संचालित कर रहे हैं

चर्चा में गतिरोध के बावजूद झू ने स्पष्ट किया कि चीन इसे जारी रखना चाहता है. उन्होंने कहा, ''दलाई लामा से बातचीत के लिए चीन जो कुछ कर सकता था, उसने किया. दरवाज़े अभी भी खुले हैं. ''

एक संसदीय बयान में ब्रिटेन के विदेशमंत्री डेविड मिलीबैंड ने 29 अक्तूबर को बातचीत का और समझौते के आधार पर स्वयत्तता के लिए दलाई लामा के आह्वान का ज़ोरदार समर्थन किया था.

मिलीबैंड ने बीसवीं शताब्दी के उस ऐतिहासिक समझौते का भी उल्लेख किया जिसमें तिब्बत में चीन की 'ख़ास स्थिति' का ज़िक्र है, लेकिन ज़ोर देकर कहा कि तिब्बत कभी भी पूरी तरह से देश का हिस्सा नहीं रहा.

नीति को एक 'पुराना तथ्य' बताते हुए उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "यूरोपीय संघ के अन्य प्रत्येक सदस्य देश और अमरीका की तरह हम तिब्बत को चीन गणराज्य का एक हिस्सा मानते हैं." झू ने कहा कि उनकी सरकार ने ब्रिटेन के बयान का सराहना करती है.

झू ने कहा, "मैं सोचता हूँ कि यह पहले से स्थापित तथ्य की स्वीकारोक्ति है. इस कदम ने ब्रिटेन को आज की दुनिया की सार्वभौमिक स्थिति में ला दिया है."

बीबीसी के विश्व मामलों के संपादक जॉन सिम्पसन का कहना है कि कूटनीतिक तरीके से यह सवाल उछाल दिया है कि क्या इसे प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के चीन को नवीन विश्व आर्थिक व्यवस्था में लाने के प्रयासों से जोड़ा जा सकता है, हालांकि निश्चित तौर पर कई पर्यवेक्षक ऐसा सोचते होंगे.

उनका कहना है कि वह यह भी सोचते होंगे कि ब्रिटेन के फ़ैसले से दलाई लामा की स्थिति कमज़ोर हुई है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more