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छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान शुरु

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बस्तर में अर्धसैनिक बलों के कुल 23 हज़ार जवान तैनात किए गए हैं
नक्सल प्रभावित बस्तर की 12 सीटों सहित छत्तीसगढ़ की 39 सीटों पर पहले चरण का मतदान शुरु हो चुका है. वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. इस चरण में दक्षिण छत्तीसगढ़ स्थित बस्तर की 12 सीटों पर भी मतदान हो रहा है जहाँ नक्सली हिंसा का व्यापक प्रभाव है.

चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं. ख़ासकर बस्तर में जहाँ वायुसेना के नौ हेलीकॉप्टर चुनाव कर्मियों को मतदान केंद्रों तक पहुँचाने और स्थित पर निगरानी रखने के लिए तैनात किया गया है.

नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत मतदान सुबह सात बजे से तीन बजे तक ही किया जाएगा ताकि सूर्यास्त से पहले ही वोटिंग मशीनों को सुरक्षित स्थानों पर लाया जा सके.

शेष इलाक़ों में मतदान सुबह आठ बजे से शाम पाँच बजे तक होगा. इन 39 सीटों के लिए कुल 379 उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस, भाजपा और बसपा ने इन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

मुख्यमंत्री रमन सिंह सहित पाँच मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे और नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा सहित कुल नौ पूर्व मंत्रियों के राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला आज वोटिंग मशीनों में बंद हो जाएगा.

विधानसभा की शेष 51 सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी सहित कई और दूसरे बड़े नेताओं के राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला दूसरे चरण में ही होगा. मतगणना आठ दिसंबर को होगी.

सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम

छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में दो चरणों में चुनाव करवाने का फ़ैसला चुनाव आयोग ने बस्तर के आदिवासी इलाक़ों को ध्यान में रखकर ही किया है जहाँ नक्सलियों का व्यापक प्रभाव है. बस्तर की सभी 12 सीटों पर नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार की अपील की है.

चुनाव कर्मियों को मतदान केंद्रों तक लाने-लेजाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इंतज़ाम किया गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार छह विधानसभा क्षेत्रों के 251 मतदान केंद्रों पर चुनाव अधिकारियों को हेलीकॉप्टर के ज़रिए भेजा गया है.

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि वायुसेना के नौ हेलीकॉप्टर इस काम में लगाए गए हैं और इसके लिए बस्तर के सुदूर इलाक़ों में 50 हेलीपैड बनाए गए हैं.

अधिकारियों के अनुसार बस्तर में नक्सली ऑपरेशन के तहत सीआरपीएफ़ की 14 बटालियनें (14 हज़ार जवान) पहले से ही मौजूद थे और चुनाव आयोग के निर्देश पर 9000 अतिरिक्त जवानों को वहाँ भेजा गया है.

इस बीच ख़बर हैं कि गुरुवार को नक्सलियों ने दंतेवाड़ा ज़िले में तीन वोटिंग मशीनें छीन लीं. चुनाव के दौरान नक्सली हिंसा में पाँच लोगों की मौत हुई है जिसमें सत्ताधारी भाजपा के दो नेता शामिल हैं.

बस्तर में मौजूद बीबीसी संवाददाता सलमान रावी का कहना है कि सूदूर इलाक़ों में न तो सुरक्षा बल पहुंच पाते हैं और न ही प्रशासन के अधिकारी. संवादादाता के अनुसार कई इलाक़ों में माओवादियों के चुनाव बहिष्कार की अपील के कारण बिल्कुल सन्नाटा पसरा और चुनाव की कोई गहमागहमी नहीं है.

राजनीतिक दृष्टि से बस्तर की इन 12 सीटों को कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट मानती रही थी लेकिन पिछले चुनाव में समीकरण बदला और कांग्रेस को सिर्फ़ तीन सीटें मिल सकीं. इस बार कांग्रेस इन सीटों को फिर से हासिल करने की कोशिशों में लगी हुई है. हालांकि इस बार सीपीआई भी एक चुनौती की तरह उभरी है.

मुक़ाबला

जिन 39 सीटों पर शुक्रवार को मतदान होना है उसमें कई दिलचस्प और बड़े मुक़ाबले हैं. बस्तर की बारह सीटों में से एक सीट नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा की भी है जो भाजपा और सीपीआई के बीच त्रिकोणीय मुक़ाबले में हैं.

अजीत जोगी और रमन सिंह एक बार फिर आमने-सामने हैं. मुख्यमंत्री रमन सिंह इस बार डोंगरगाँव की सीट बदलकर राजनांदगाँव से चुनाव लड़ रहे हैं और ख़बरें हैं कि वहाँ उन्हें कांग्रेस के मौजूदा विधायक उदय मुदलियार से कड़ी चुनौती मिल रही है.

इसके अलावा इसी चरण में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे की सीट भिलाई में मतदान होना है, जहाँ उनके मुक़ाबले पूर्व मंत्री बदरुद्दीन क़ुरैशी मैदान में हैं. इसके अलावा भाजपा सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर, हेमचंद्र यादव, लता उसेंडी और केदार कश्यप के राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला इसी चरण में होना है.

केदार कश्यप राज्य के बड़े आदिवासी नेता और भाजपा सांसद बलीराम कश्यप के बेटे हैं. वैसे कांग्रेस के मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा और अरविंद नेताम की बेटी प्रीति नेताम का चुनाव भी इसी चरण में होना है.

राज्य के पूर्व मंत्रियों में से नौ का राजनीतिक भविष्य इस चरण में दाँव पर है. इसमें महेंद्र कर्मा के अलावा विपक्ष के उपनेता भूपेश बघेल, गीतादेवी सिंह, मोहम्मद अक़बर, रवींद्र चौबे, ताम्रध्वज साहू, धनेश पाटिला और डेरहू प्रसाद धृतलहरे हैं.

जिन 39 सीटों पर शुक्रवार को मतदान होगा उनमें से 23 सीटों पर पिछली बार भाजपा ने कब्जा कर लिया था जबकि कांग्रेस के पास 10 सीटें आई थीं. शेष छह सीटें इस बार परिसीमन के बाद नई विधानसभा सीटों की तरह उभरी हैं.

कांग्रेस इस समीकरण को बदलने की कोशिशों में लगी हुई है जबकि भाजपा की चाहत है कि 2003 का चुनावी परिणाम इस बार भी दोहरा दिया जाए.

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