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छत्तीसगढ़ में हैं कई दिलचस्प मुक़ाबले

By विनोद वर्मा
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भाजपा छत्तीसगढ़ विधानसभा में फिर से कब्जा जमाने की कोशिशों में लगी हुई है
विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ में कई दिलचस्प मुक़ाबलें हैं. कुछ बड़े नेताओं के कारण और कुछ बड़े नेताओं के बेटे-बेटियों के चुनावी मैदान में होने से.

इनमें से कुछ उम्मीदवारों के नाम और क़द की वजह से दिलचस्प हो गए हैं तो कुछ राजनीतिक समीकरणों की वजह से.

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कॉंग्रेस की प्रतिष्ठा इन सीटों पर दाँव पर तो है लेकिन इन्हीं में से कई सीटों पर भितरघात भी दिखाई पड़ रहा है.

कांग्रेस ने जहाँ 90 में से तीन सीटें अपनी सहयोगी पार्टी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के लिए छोड़ दी हैं तो भाजपा सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

रमन सिंह बनाम अजीत जोगी

मुख्यमंत्री रमन सिंह इस बार राजनांदगाँव से चुनाव लड़ रहे हैं. यह उनकी परंपरागत सीट नहीं रही है. वे कवर्धा के रहने वाले हैं और वहीं से चुनाव लड़ते रहे हैं लेकिन पिछला चुनाव उन्होंने डोंगरगाँव से जीता था.

लेकिन इस बार वे राजनांदगाँव आ गए हैं. राजनांदगाँव लोकसभा सीट से ही कांग्रेस के बड़े नेता मोतीलाल वोरा को हराकर वे लोकसभा में पहुँचे थे और केंद्रीय मंत्री बने थे.

राजनांदगाँव में उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस के वर्तमान विधायक उदय मुदलियार हैं.

मुक़ाबला एक बार फिर अजीत जोगी बनाम रमन सिंह हो गया दिखता है

हालांकि माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री के लिए चुनाव आसान होगा लेकिन उनकी पत्नी और बेटे को लगातार चुनाव प्रचार करना पड़ रहा है और रमन सिंह को पूरे प्रदेश के अलावा राजनांदगाँव में भी अपना कुछ समय देना पड़ रहा है. यानी लड़ाई आसान भले हो, पूरी तरह से एकतरफ़ा नहीं दिख रही है.

दूसरी ओर अजीत जोगी हैं. वे महासमुंद से लोकसभा सदस्य हैं लेकिन पार्टी के कई नेताओं के विरोध के बावजूद उन्हें उनकी पुरानी सीट मरवाही से टिकट मिल गई है.

उनके ख़िलाफ़ भाजपा के धानसिंह पोर्ते और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अमर सिंह हैं.

लेकिन अपनी जीत के प्रति आश्वस्त अजीत जोगी ने पहले भी घोषणा की थी और अब भी घोषणा करते घूम रहे हैं कि वे मरवाही में चुनाव प्रचार करने नहीं जाएँगे.

पार्टी का कहना है कि वह किसी को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाकर पेश नहीं कर रही है लेकिन अजीत जोगी पूरे प्रदेश के मतदाताओं के सामने मुख्यमंत्री पद के दावेदार की तरह ही आ रहे हैं.

पिछले चुनावों में अजीत जोगी राज्य के मुख्यमंत्री थे और रमन सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष. यानी एक बार फिर लड़ाई में रमन सिंह और अजीत जोगी आमने सामने हैं.

कांग्रेस के कई दिग्गजों का भविष्य दाँव पर

राज्य में कम से कम एक दर्जन ऐसी सीटें हैं जिस पर लोगों की नज़रें लगी हुई हैं और नेताओं के क़द की वजह से वहां मुक़ाबला दिलचस्प दिख रहा है.

एक सीट कोटा की है जहाँ से अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी हैं. रेणु जोगी ने यह सीट उपचुनाव में जीती थी. इस बार वहाँ उनका मुक़ाबला भाजपा के पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल से है.

पाँच साल नेता प्रतिपक्ष रहे महेंद्र कर्मा बस्तर से अपनी पुरानी सीट दंतेवाड़ा से फिर मैदान में हैं. वे सलवा जुड़ुम के प्रणेता रहे हैं और यही उनकी सीट पर मुख्यमुद्दा भी है.

मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा को दो चुनाव हारने के बाद तीसरी बार टिकट दी गई है

कर्मा को इस सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मनीष कुंजाम से कड़ी चुनौती मिल रही है और भाजपा के भीमा मंडावी ने दिलचस्प त्रिकोण बना रखा है.

चुनाव के पहले प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने वाले धनेन्द्र साहू अपनी पुरानी सीट अभनपुर से लड़ रहे हैं और उनके सामने हैं पूर्व सांसद चंद्रशेखर साहू.

प्रदेश कांग्रेस के दो कार्यकारी अध्यक्षों में से एक सत्यनारायण शर्मा राजधानी रायपुर की चार सीटों में से एक पर लड़ रहे हैं. उनकी पुरानी सीट मंदिर हसौद सीमांकन में विलुप्त हो गई है. वहाँ उन्हें भाजपा के नंदकुमार साहू से मुक़ाबला करना पड़ रहा है.

विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष रहे भूपेश बघेल तीन बार से पाटन सीट जीतते रहे हैं इस बार उनके सामने भाजपा के विजय बघेल ने कड़ी चुनौती रखी है.

बड़े नेताओं के बेटे-बेटियों की तीन सीटों पर भी लोगों की नज़र लगी हुई है.

इनमें से एक है दुर्ग शहर की सीट जहाँ से कांग्रेस कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा फिर से मैदान में हैं. पिछला दो चुनाव वे इसी सीट से बुरी तरह हार चुके हैं. उनके ख़िलाफ़ भाजपा के मंत्री हेमचंद्र यादव हैं.

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला के बेटे अतितेश शुक्ला अपने पिता के निधन के बाद पहला चुनाव लड़ रहे हैं. वह भी राजिम सीट पर जहाँ से वे पिछला चुनाव हार गए थे. इस सीट पर भाजपा ने अपने विधायक की टिकट काटकर संतोष उपाध्याय को टिकट दी है.

केंद्र में कई बरस मंत्री रहे आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने अपनी बेटी प्रीति नेताम के लिए कांकेर की टिकट का इंतज़ाम किया है. वहाँ उन्हें भाजपा के चंद्रप्रकाश ठाकुर उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं.

भाजपा नेताओं के लिए चुनौती

विधानसभा अध्यक्ष रहे प्रेमप्रकाश पांडे भिलाई विधानसभा से चुनाव मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ उनके परंपरागत प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बदरुद्दीन क़ुरैशी फिर से सामने हैं.

भाजपा के ताक़तवर मंत्री माने जाने वाले बृजमोहन अग्रवाल के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने युवक कांग्रेस के नेता योगेश तिवारी को टिकट दी है. हालांकि लोग इसे बराबरी की लड़ाई नहीं मान रहे हैं.

एक और मंत्री अमर अग्रवाल बिलासपुर में कांग्रेस के अनिल टाह से कठिन चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं. तो रायपुर में मंत्री राजेश मूणत के सामने कांग्रेस ने संतोष अग्रवाल को टिकट दी है.

जूदेव ने अपने बेटे के लिए टिकट जुटा ली है

एक और ताक़तवर और चर्चित मंत्री अजय चंद्राकर कुरुद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के लेखराम साहू के सामने विधानसभा में अपनी वापसी की लड़ाई लड़ रहे हैं.

दुर्ग से लगी नई सीट वैशालीनगर से इस बार भाजपा ने दुर्ग की मेयर सरोज पांडे को टिकट दी है. सरोज पांडे ने कुछ ही समय में काफ़ी प्रगति की है. उनके सामने कांग्रेस के बृजमोहन सिंह हैं.

एक दिलचस्प मुक़ाबला पत्थलगाँव में हैं जहाँ प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और सांसद विष्णु देव साय चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुक़ाबला छह बार विधायक रह चुके रामपुकार सिंह से है.

सीतापुर विधानसभा क्षेत्र से गणेशराम भगत के मुक़ाबले अमरजीत भगत की चुनावी लड़ाई पर भी लोगों की नज़रें है. गणेश राम भगत भाजपा के मंत्री भी रहे हैं.

नेताओं पुत्रों में एक सीट नारायणपुर की है जहाँ से वरिष्ठ आदिवासी नेता बलीराम कश्यप के बेटे और राज्य में मंत्री रहे केदार कश्यप चुनाव लड़ रहे हैं.

वहीं चर्चित नेता दिलीप सिंह जूदेव ने अपने बेटे युद्धवीर सिंह के लिए चंद्रपुर की सीट चुनी है. यह सीट एनसीपी के अध्यक्ष नोबेल वर्मा की रही है और जूदेव परिवार की चुनौती बढ़ाने के लिए भाजपा के बागी उम्मीदवार कृष्णकांत चंद्रा भी मैदान में हैं.

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