विहिप से कोई रिश्ता नहीं: सोनल शाह

सोनल शाह ने साफ कहा है कि भारत के दंक्षिणपंथी संगठनों-विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका कोई संबंध नहीं है। उहोंने यह भी कहा कि वो विभाजन की राजनीति के पूरी तरह खिलाफ हैं।
प्रतिष्ठित इकॉनमिस्ट सोनल को अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने अडवाइजरी बोर्ड का मेंबर चुना है। यह टीम सत्ता के ट्रांसफर में ओबामा की मदद के लिए बनाई गई है।
सोनल ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं मानवहित में काम करने वाले ऐसे एनजीओ से जुड़ी हुई हूं, जिसने गुजरात में भूकंप के समय पड़े पैमाने पर पीड़ितों की मदद की। 40 साल की सोनल ने कहा कि न तो मैं कभी भारतीय राजनीति में सक्रिय रही हूं और न ही ऐसा करने की इच्छुक हूं।
सोनल जिस पैनल का हिस्सा बनी हैं उसमें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के अनुभवी लोगों को रखा गया है। यह पैनल अपनी-अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सत्ता हस्तांतरण में ओबामा को सलाह देकर करेगा। एक बयान में सोनल ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत वीएचपी, आरएसएस या ऐसे दूसरे संगठनों के विचारों से कतई मेल नहीं खाती।
मैंने हमेशा ही बंटवारे की राजनीति, नस्लीय या धार्मिक बैर, हिंसा और धमकी का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की निंदा की है। खुद को दक्षिणपंथी संगठनों से जोड़े जाने की रिपोर्ट को इंटरनेट द्वारा फैलाई गई अफवाह करार दिया है।


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