चुनाव प्रचार: किराए पर मिल रहे कार्यकर्ता

कई इलाकों में गुपचुप तो कहीं-कहीं खुले तौर पर प्रचार के लिए कार्यकर्ता आसानी से मिल रहे हैं। किराए पर मिलने वाले ये कार्यकर्ता अनपढ़ नहीं बल्कि पढ़े लिखे और सूट-बूट वाले भी हैं।
अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी बड़े नेताओं की सभाओं से लेकर रैलियों तक के लिए विभिन्न पार्टियों द्वारा भीड़ जुटाई जाती रही है। भीड़ जुटाना राजनीतिक दलों की मजबूरी है और इसके लिए वे बड़े पैमाने पर धन-राशि खर्च करने में पीछे नहीं रहते। पिछले चुनावों पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि पार्टियां ग्रामीण इलाकों में वाहन और खाने का इंतजाम करके भीड़ जुटाती थीं।
राजनीतिक दलों की भीड़ जुटाने की मजबूरी को बेरोजगारों ने भी भुनाना शुरू कर दिया है। इस बार बैतूल शहर के खंजनपुर इलाके के तो बेरोजगारों ने एक संगठन बनाकर बाकायदा पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। 'बेरोजगार युवा संघ' नामक एक संगठन ने किराए पर युवाओं की भीड़ उपलब्ध कराने का इश्तहार दिया है।
इस संगठन में 200 युवा है जो राजनीतिक दलों से मेहनताना लेकर उनके लिए प्रचार करने को तैयार हैं। बेरोजगारों के इस संगठन ने सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक के लिए एक दिन का मेहनताना 100 रुपए तय किया है।
इसके अतिरिक्त शाम छह बजे के बाद प्रति घंटा 50 रुपए ओवर टाइम देना होगा। दोपहर के भोजन की व्यवस्था राजनीतिक दलों को करनी पड़ेगी। कार्यकर्ता को रात में रोकने पर सोने का इंतजाम और भोजन भी उपलब्ध कराना पार्टी की जिम्मेदारी में शामिल रहेगा। आने जाने की व्यवस्था भी किराए पर कार्यकर्ता लेने वाले दल को करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं किराए के कार्यकर्ता एक दिन में 25 से ज्यादा नारे नहीं लगाएंगे।
'बेरोजगार युवा संघ' के सदस्य विनोद मालवीय कहते हैं कि युवा किसी भी दल के प्रत्याशी का फोकट में प्रचार नहीं करेगा। जो दल और उम्मीदवार उनकी शर्तो को मानेगा उसी के लिए वे बतौर भीड़ प्रचार में पहुंचेंगे। उन्होंने सभी बेरोजगारों से भी अपील की है कि वे किसी दल के लिए फोकट में अपना समय बर्बाद न करें।
बैतूल में लगे किराए के कार्यकर्ताओं से संबंधित पोस्टर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। साथ ही राजनीतिक दल भी असमंजस में पड़ गए हैं कि वे भीड़ जुटाने के लिए किराए के कार्यकर्ता लें अथवा नहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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