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मालदीव को कहाँ बसाया जाए?

By Staff
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मालदीव समुद्र की सतह से केवल दो मीटर ही ऊपर है
मालदीव के समुद्र से घिरे होने और निचले स्तर के कारण उसके राष्ट्रपति लोगों को कहीं और बसाने पर विचार कर रहे हैं.

स्थान के लिए वह जिन देशों पर विचार कर रहे हैं उनमें भारत और श्रीलंका शामिल हैं.

उनका कहना है कि समुद्र के स्तर में लगातार वृद्धि से दुनिया भर के मौसम में जो बदलाव आया है उसका मतलब यही है कि मालदीव के रहने वालों को कहीं न कहीं और जा कर बसना पड़ेगा.

सफ़ेद बालू वाले तटों और ताड़ और खजूर के पेड़ों से आच्छादित हज़ारों द्वीपों और मूंगे के वृताकार द्वीप समूहों वाला देश मालदीव स्वर्ग जैसा लगता है. लेकिन यह स्वर्ग सिकुड़ता जा रहा है. साल-दर-साल इसका आकार घटता जा रहा है.

मालदीव एक ऐसा देश है जो सबसे निचले स्तर पर बसा हूआ है. उसकी जो सबसे ऊपरी ज़मीन है वह भी समुद्र के स्तर से दो मीटर ही ऊपर है.

समुद्र का स्तर बढ़ेगा

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि समुद्र का स्तर इस सदी के अंत तक 60 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा.

हमें हर विकल्प को परखना होगा. चाहे वो भारत हो, श्रीलंका हो या फिर दक्षिण-पूर्व एशिया का कोई देश.
मालदीव में एक हज़ार से अधिक द्वीप हैं और वह हिंद महासागर से घिरा हुआ है.

राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम हुसैन ज़की का कहना है कि मालदीव के सामने भविष्य के लिए दीर्घकालीन योजना पर विचार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. ज़की ने बताया कि विदेशों में ज़मीन ख़रीदने के लिए नई सरकार एक कोष बनाएगी.

मोहम्मद ज़की ने कहा, "नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने जिन नीतियों पर काम करने की योजना बनाई है उसमें एक है हमारे सुरक्षित कोष, हमारे राष्ट्रीय सुरक्षित भंडार को इस स्तर तक बढ़ाना ताकि वो हमारे लिए बीमा साबित हो सके. हम उसे पास के किसी देश में ज़मीन में निवेश कर सकें. ताकि जब कभी भी मालदीव और उसकी जनता को कोई ख़तरा हुआ तो उन्हें स्थानांतरित करने का विकल्प मौजूद रहे".

प्रमुख पर्यटन स्थल

ज़की ने राष्ट्रपति की योजना को जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ बीमा पॉलिसी बताया. मालदीव को पर्यटन के ज़रिए हर साल अरबों डॉलर मिलते हैं, इसलिए इस पॉलिसी का प्रीमियम जमा करना उसके लिए मुश्किल नहीं होगा.

मालदीव के राष्ट्रपति ज़मीन के लिए जिन देशों के बारे में सोच रहे हैं उनमें श्रीलंका और भारत प्रमुख हैं.

उनके प्रवक्ता ज़की ने इस बारे में कहा, "हमें हर विकल्प को परखना होगा. चाहे वो भारत हो, श्रीलंका हो या फिर दक्षिण-पूर्व एशिया का कोई देश. मुझे याद आता है किसी अंतरराष्ट्रीय अख़बार में छपा एक लेख कि ऑस्ट्रेलिया मालदीव के लोगों को पर्यावरणीय शरणार्थियों के रूप में जगह देने वाला है. अब हम ये कह रहे हैं कि हमारे सामने एक पूर्ण विकल्प होना चाहिए जो कि राष्ट्रीय सुरक्षित कोष को बढ़ाने से ही संभव होगा".

राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को डर है कि यदि भविष्य के लिए अभी से ही योजनाएँ नहीं बनाई गईं तो मालदीव के तीन लाख नागरिक पर्यावरणीय शरणार्थी बनने को विवश हो सकते हैं.

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