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'धमाकों में अलगाववादियों का हाथ'

By सुबीर भौमिक
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बांग्लादेश ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी लेने से इंकार किया है.
असम पुलिस का कहना है कि इस बात के पुख़्ता सबूत हैं कि 30 अक्तूबर को गुवाहाटी में हुए बम धमाकों में दो अलगाववादी गुटों का हाथ था.

इन धमाकों में 84 लोग मारे गए थे.

पिछले दो दिनों में कुछ अलगाववादियों के शक्तिशाली विस्फोटकों के साथ पकड़े जाने से भारत के गृह मंत्रालय को डर है कि ऐसे और भी धमाके हो सकते हैं.

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमारी राष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि यह भीषण हमले अलगाववादी गुटों ने ही किए हैं. हमें आशंका है कि उनके संबंध बांग्लादेश के कुछ इस्लामी कट्टरवादी गुटों से हो सकते हैं लेकिन हमें इस बारे में अभी और जानकारी चाहिए."

उन्होंने कहा कि वे नाम नहीं लेना चाहते और जानकारी आम भी नहीं करना चाहते क्योंकि अभी भी 30 अक्तूबर के धमाकों के बारे में जाँच जारी है.

हमारी राष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि यह भीषण हमले अलगाववादी गुटों ने ही किए हैं.
बांग्लादेश ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया है. अपने एक कठोर बयान में वहाँ के विदेश मंत्री ने भारत से बिना सबूत के किसी पर उंगली न उठाने को कहा है.

यह बयान मीडिया रिपोर्टों में एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी के एक बयान के प्रकाशित होने के बाद आया जिसमें उन्होंने 30 अक्तूबर के धमाकों के लिए बांग्लादेश के संगठनों पर आरोप लगाया था.

क़रीबी रिश्ते

असम पुलिस ने कुछ लोगों को ग़िरफ़्तार किया है जिन्होंने धमाकों के लिए कार और दूसरे उपकरण उपलब्ध कराए थे. उनके अल्फ़ा और नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) से क़रीबी रिश्ते पाए गए.

भारत के गृह मंत्रालय को डर है कि ऐसे और भी धमाके हो सकते हैं.

अल्फ़ा असम का प्रमुख अलगाववादी गुट है और एनडीएफ़बी बोडो जनजाति के लिए अलग राज्य की माँग के लिए लड़ रहा है.

अल्फ़ा के नेता धीरेन बोरा को तेज़पुर में कैंटोनमेंट क्षेत्र में जहाँ भारतीय सेना की चौथी कमान तैनात है, के पास अपनी कार में नौ किलोग्राम घातक विस्फोटक पदार्थ के साथ गिरफ़्तार किया गया था.

सोनितपुर ज़िले के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार ने कहा, "विस्फोटक को कार के पेनल में सावधानीपूर्वक रखा गया था. रोज़मर्रा की होने वाली इस जाँच में हमें कुछ ख़ास नहीं मिला था लेकिन हमें ख़बर मिल गई थी. और जब कार तेज़पुर के पास एक पुल पर पहुँची तो हमने इसे रोका और पेनल को खोलकर देखा."

उन्होंने कहा, "वह कार बम तो नहीं था लेकिन कार को विस्फोटक को लाने के लिए प्रयोग ज़रूर किया गया था."

बोरा ने यह सामग्री विद्रोहियों के किसी दूसरे गुट से मंगवाई थी. यह गुट अल्फ़ा नहीं बल्कि कार्बी लोंगरी नेशनल लिबरेशन फ़्रंट है जो कार्बी जनजाति के अधिकारों के लिए लड़ रहा है.

गहन जाँच की ज़रूरत

केएलएनएलएफ़ अल्फ़ा का सहयोगी है और 30 अक्तूबर के ठीक बाद से उन्होंने असम में हिंदीभाषी लोगों पर हमले करना शुरू कर दिया.

यह धमाका पूर्वोत्तर में हुए धमाकों में सबसे तगड़ा था.

असम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जीएम श्रीवास्तव ने कहा, "ऐसा लगता है कि अल्फ़ा और उनके सहयोगियों ने 30 अक्तूबर को प्रयोग किये गए विस्फोटक से भी ज़्यादा सामग्री को कहीं और स्थानांतरित कर दिया है. इसलिए हमें अब और भी ज़्यादा नज़र रखनी होगी."

उन्होंने कहा कि असम पुलिस को उन हमलावरों को खोजने के लिए गहन जाँच करनी होगी क्योंकि वे अब भी आसपास हैं.

अल्फ़ा और एनडीएफ़बी के नज़दीकी कुछ लोगों को ग़िरफ़्तार किया गया है जिन पर विस्फोटक लाने ले जाने के लिए प्रयोग की गई कारों को ख़रीदने या किराए पर लेने का आरोप है.

अल्फ़ा और एनडीएफ़बी ने विस्फोटों में किसी भी तरह का हाथ होने से इंकार किया है. दरअसल एनडीएफ़बी की भारत सरकार के साथ क्षेत्र में युद्ध विराम की बातचीत चल रही है.

घातक मिश्रण

श्रीवास्तव ने कहा कि सवाल-जबाव के लिए गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान को जाँच के हित में गुप्त रखा जाना ज़रूरी है.

असम के न्यायिक विशेषज्ञ पद्म पानी ने बीबीसी से कहा कि विद्रोहियों ने 30 अक्तूबर के विस्फोटों में आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट और प्लास्टिसीन के घातक मिश्रण का बड़ी मात्रा में प्रयोग किया था.

उन्होंने कहा, "गुवाहाटी के विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए हर कार में 20 से 25 किलोग्राम विस्फोटक था जो पूर्वोत्तर में अब तक प्रयोग किए गए विस्फोटक से बहुत ज़्यादा है."

वे इन विस्फोटों की जाँच कर रही टीम के विशेषज्ञों में से एक हैं जिन्हें पूर्वोत्तर में हुए विस्फोटों की जाँच करने का अनुभव 25 सालों से भी ज़्यादा है.

गुवाहाटी के विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए हर कार में 20 से 25 किलोग्राम विस्फोटक था जो पूर्वोत्तर में अब तक प्रयोग किए गए विस्फोटक से बहुत ज़्यादा है
उन्होंने कहा, "यह तो पूर्वोत्तर के आतंकवाद का एक नमूनाभर है. यह विस्फोट डराने या आतंकित करने के लिए नहीं बल्कि मासूम लोगों को मार डालने के लिए किए गए थे."

लेकिन 1992 में भी असम की राजधानी गुवाहाटी में पल्टन बाज़ार के पास एक बस में ऐसा ही विस्फोट हुआ था जिसमें 40 से भी ज़्यादा लोग मारे गए थे.

एनडीएफ़बी नहीं पर बोडो जनजाति के उन विद्रोहियों, जो आजकल भारत सरकार के साथ शांति के प्रयास कर रहे हैं, पर पल्टन बाज़ार के विस्फोट का आरोप लगा था.

सेवानिवृत्त खुफ़िया अधिकारी बीबी नंदी कहते हैं, "इस बात में कोई तथ्य नहीं है कि इन अलगाववादियों को शक्तिशाली बम बनाने के लिए इस्लामिक चरमपंथियों का समर्थन मिल रहा है."

उन्होंने कहा कि उनके संबंध इस्लामिक चरमपंथियों के साथ हो सकते हैं क्योंकि यह अलगाववादी भी बांग्लादेश में आधारित हैं. लेकिन उन्हें ऐसे शक्तिशाली बम बनाने के लिए किसी की सहायता की ज़रूरत नहीं है. वे इसके लिए पहले से ही प्रशिक्षित हैं.

अल्फ़ा और एनडीएफ़बी दोनों का ही सिलसिलेवार विस्फोटों का लंबा इतिहास रहा है. वे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर विस्फोटों को अंजाम भी दे चुके हैं.

पिछले सात सालों में हुए ऐसे हर विस्फोट में दस से 40 तक लोग मारे गए हैं.

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