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मंदी की आशंका में बाज़ार फिर गिरे

By Staff
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सरकारों की कोशिशों का शेयर बाज़ारों पर सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है
वैश्विक मंदी की आशंका से दुनिया भर के शेयर बाज़ार तेज़ी से गिरे हैं. उधर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने अगला एक साल नकारात्मक होने की आशंका जताई है.

जापान में शुरुआती कारोबार में सात प्रतिशत की गिरावट दिखाई पड़ी है. इससे पहले न्यूयॉर्क के डाउ जोन्स संवेदी सूचकांक में पाँच प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.

लंदन, पेरिस और फ़ैंकफ़र्ट सभी बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

उधर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ़) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में आशंका व्यक्त जताई है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए अगले एक साल तक का समय नकारात्मक हो सकता है.

विकसित देशों में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार ऐसी नौबत आ सकती है.

गिरावट

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने ब्याज़ दरों में डेढ़ प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है और यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने भी ब्याज़ दर में कुछ कमी का ऐलान किया है.

ब्याज़ दरों में कटौती इसलिए की गई है ताकि उपभोक्ताओं में खर्च करे और कारोबार को बढ़ावा मिले.

इसके बावजूद शेयर बाज़ारों में गिरावट को रोका नहीं जा सका है.

एशियाई बाज़ारों में भी गिरावट का दौर जारी है

न्यूयॉर्क में डाउ जोन्स 443.2 अंक यानी 4.9 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ. इससे पहले बुधवार को 486 अंकों की गिरावट देखने में आई थी.

उधर लंदन में एफ़टीएसई 100 गुरुवार को 5.7 प्रतिशत, फ़्रैंकफ़र्ट में डैक्स 6.8 प्रतिशत और पेरिस में कैक 40 बाज़ार बंद होने तक 6.4 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुए.

जापान और हांगकांग के शेयर बाज़ारों में बुधवार को भी गिरावट दर्ज की गई थी.

आईएमएफ़ की रिपोर्ट

आईएमएफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में आशंका व्यक्त जताई है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए अगले एक साल तक का समय नकारात्मक हो सकता है.

अभी कोई एक महीना पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के बारे में अपना अनुमान प्रकाशित किया था.

लेकिन पिछले एक महीने में हर और से इतने बुरे समाचार आए कि आइएमएफ़ को अपनी नई रिपोर्ट जारी करनी पड़ी.

इसमें कहा गया है कि अगले वर्ष विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर दो दशमलव दो प्रतिशत रहेगी. मंदी की कुछ परिभाषाओं के अनुसार इस विकास दर का मतलब है वैश्विक मंदी.

आइएमएफ़ की पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर तीन प्रतिशत रहेगी. उसने विकसित देशों में विकास की दर के आधा प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.

लेकिन अब उसने विकसित अर्थव्यवस्थाओं को चेतावनी दी है अगले साल उनकी विकास दर नकारात्मक हो सकती है.

भारत के लिए भी चिंता

वहीं भारत-चीन-ब्राज़ील जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के बारे में आइएमएफ़ का कहना है कि वहाँ विकास दर घटकर पाँच प्रतिशत के आस-पास आ जाएगी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के मुख्य अर्थशास्त्री ओलिविए ब्लैनचर्ड ने बताया कि आईएमएफ़ को अपनी रिपोर्ट में अनुमानित विकास दर को क्यों घटाना पड़ा.

भारत में भी दुनिया के शेयर बाज़ारों का असर दिख रहा है

उन्होंने कहा, "विकसित देशों में हमने जितना सोचा था उससे कहीं अधिक गिरावट हुई है. यह पहला कारण है कि हमने क्यों विकास के कम रहने का अनुमान लगाया है. दूसरा कारण ये है कि उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भी कर्ज़ की स्थिति ख़राब होती जा रही है इसीलिए हमने उन देशों की भी अनुमानित विकास दर को एक प्रतिशत घटा दिया है."

आइएमएफ़ ने जिन विकसित देशों में विकास दर घटने का अनुमान व्यक्त किया है उनमें ब्रिटेन पहले नंबर पर है जहाँ विकास की दर एक दशमलव तीन प्रतिशत नीचे जा सकती है.

इसके बाद जर्मनी का नंबर है जहाँ शून्य दशमलव आठ प्रतिशत और फिर अमरीका और स्पेन में विकास दर में शून्य दशमलव सात प्रतिशत की कमी आएगी.

आइएमएफ़ के अनुसार अगले साल तक चीन में विकास दर 9.3 प्रतिशत से घटकर साढ़े आठ प्रतिशत और भारत में 6.9 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत हो सकती है.

रूस में विकास दर साढ़े पाँच प्रतिशत से घटकर साढ़े तीन प्रतिशत पर जा सकती है.

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