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विकसित अर्थव्यवस्थाओं को लेकर चिंता

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आर्थिक संकट की मार विकसित अर्थव्यवस्थाओं को भी हिला रही है
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जताई है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए अगले एक साल का समय नकारात्मक हो सकता है.

विकसित देशों में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार ऐसी नौबत आ सकती है.

आईएमएफ़ की ताज़ा रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जबकि अमरीकी और यूरोपीय बाज़ारों में गिरावट का क्रम जारी है और गुरुवार को बाज़ारों में पाँच प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई.

अभी कोई एक महीना पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के बारे में अपना अनुमान प्रकाशित किया था.

लेकिन पिछले एक महीने में हर और से इतने बुरे समाचार आए कि आइएमएफ़ को अपनी नई रिपोर्ट जारी करनी पड़ी.

इसमें कहा गया है कि अगले वर्ष विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर दो दशमलव दो प्रतिशत रहेगी. मंदी की कुछ परिभाषाओं के अनुसार इस विकास दर का मतलब है वैश्विक मंदी.

आइएमएफ़ की पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर तीन प्रतिशत रहेगी. उसने विकसित देशों में विकास की दर के आधा प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.

लेकिन अब उसने विकसित अर्थव्यवस्थाओं को चेतावनी दी है अगले साल उनकी विकास दर नकारात्मक हो सकती है.

भारत के लिए भी चिंता

वहीं भारत-चीन-ब्राज़ील जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के बारे में आइएमएफ़ का कहना है कि वहाँ विकास दर घटकर पाँच प्रतिशत के आस-पास आ जाएगी.

भारत में भी विकास दर नीचे आने की आशंका है

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के मुख्य अर्थशास्त्री ओलिविए ब्लैनचर्ड ने बताया कि आईएमएफ़ को अपनी रिपोर्ट में अनुमानित विकास दर को क्यों घटाना पड़ा.

उन्होंने कहा, "विकसित देशों में हमने जितना सोचा था उससे कहीं अधिक गिरावट हुई है. यह पहला कारण है कि हमने क्यों विकास के कम रहने का अनुमान लगाया है. दूसरा कारण ये है कि उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भी कर्ज़ की स्थिति ख़राब होती जा रही है इसीलिए हमने उन देशों की भी अनुमानित विकास दर को एक प्रतिशत घटा दिया है."

आइएमएफ़ ने जिन विकसित देशों में विकास दर घटने का अनुमान व्यक्त किया है उनमें ब्रिटेन पहले नंबर पर है जहाँ विकास की दर एक दशमलव तीन प्रतिशत नीचे जा सकती है.

इसके बाद जर्मनी का नंबर है जहाँ शून्य दशमलव आठ प्रतिशत और फिर अमरीका और स्पेन में विकास दर में शून्य दशमलव सात प्रतिशत की कमी आएगी.

आइएमएफ़ के अनुसार अगले साल तक चीन में विकास दर 9.3 प्रतिशत से घटकर साढ़े आठ प्रतिशत और भारत में 6.9 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत हो सकती है.

रूस में विकास दर साढ़े पाँच प्रतिशत से घटकर साढ़े तीन प्रतिशत पर जा सकती है.

खर्चों पर नियंत्रण

आइएमएफ़ ने साथ ही कहा है कि यदि सरकारें वित्तीय नीतियों के सहारे करों और ख़र्चों पर नियंत्रण करने के उपाय करती हैं तो उससे स्थिति बेहतर हो सकती है.

बाज़ार की स्थिति संभालने के लिए और प्रयास करने की ज़रूरत है

आइएमएफ़ अधिकारियों का कहना है कि सरकारों को जहाँ-जहाँ संभव हो वहाँ बैंक दरों में कटौती करनी चाहिए.

आइएमएफ़ की नई रिपोर्ट जारी होने से कुछ ही देर पहले यूरोप में यूरो मुद्रा वाले देशों, ब्रिटेन और स्विट्ज़रलैंड में सरकारों ने बैंक दर घटा दिए.

ब्रिटेन में डेढ़ प्रतिशत की भारी कटौती की गई और अब ब्रिटेन में 1955 के बाद पहली बार बैंक दर तीन प्रतिशत के स्तर पर चला गया है.

मगर इन उपायों के बावजूद यूरोप और अमरीका के शेयर बाज़ारों में कीमतें लगातार नीचे गिर रही हैं.

समझा जा रहा है कि निवेशकों का मुख्य ध्यान अभी ब्याज़ दरों में कटौती जैसे उपायों पर नहीं बल्कि आनेवाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की चिंताजनक स्थिति पर केंद्रित है.

आईएमएफ़ ने इन ताज़ा प्रयासों की सराहना तो की है पर साथ ही कहा है कि और अधिक प्रयास किए जाने की ज़रूरत है.

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