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असमः मृतकों की तादाद 65, कर्फ़्यू में ढील

By सुबीर भौमिक
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मृतकों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है और 150 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में गुरुवार को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में मरनेवालों की तादाद बढ़कर 65 हो गई है. डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग घायल हैं.

उधर धमाकों के बाद राज्य के जिन इलाकों में कर्फ़्यू लगा दिया गया था, वहाँ शुक्रवार को कर्फ़्यू हटा लिया गया है.

गुरुवार को इतने बड़े पैमाने पर धमाकों के बाद कई स्थानों पर उत्तेजित जनता ने विरोध-प्रदर्शन किए थे. नाराज़ लोगों ने कई वाहनों में आग लगा दी जिसके बाद प्रशासन ने गुवाहाटी, दिसपुर तथा गणेशगुड़ी में कर्फ़्यू लगा दिया था.

धमाकों के एक दिन बाद असम में आम लोगों के बीच काफ़ी तनाव व्याप्त है. लोग डरे और सहमे हुए हैं. मृतकों और घायलों के घरों में विलाप है.

हालांकि कर्फ़्यू हटा लिया गया है पर लोग अभी भी कम ही बाहर निकल रहे हैं. इन धमाकों ने राज्य को हिलाकर रख दिया है.

गुरुवार को गुवाहाटी सहित राज्य में कुछ अन्य इलाकों में कुछ मिनटों के भीतर ही सिलसिलेवार ढंग से कई धमाके हुए थे. ये धमाके दिन में 11 बजे के आसपास हुए थे.

इन धमाकों में मारे गए लोगों में से 35 तो गुवाहाटी में ही मारे गए हैं जबकि बाकी जगह हुए धमाकों में 30 और लोगों की मौत हो गई है. जो घायल हैं, उनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.

ज़िम्मेदार कौन..?

धमाकों में गुवाहाटी, पश्चिमी शहर कोकराझार और असम के निचले हिस्से के बारपेटा और बोंगाईगाँव इलाकों को निशाना बनाया गया था.

पर धमाकों को लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी चरमपंथी संगठन ने या अलगाववादी गुट ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

गुरुवार को ही राज्य में सक्रिय अलगाववादी संगठन, युनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (अल्फ़ा) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि उनका इन धमाकों से कोई ताल्लुक नहीं है.

पर राज्य की पुलिस और ख़ुफ़िया तंत्र इस दलील से सहमत नहीं हैं. शक की सुई अभी भी अल्फ़ा के इर्द-गिर्द ही धूम रही है.

पुलिस का कहना है कि राज्य में अल्फ़ा के अलावा और कोई ऐसा गुट नहीं है जो इतने बड़े पैमाने पर और इतने सुनियोजित ढंग से धमाके कर सके.

असम में अधिकारियों और खुफ़िया तंत्र की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि इससे पहले भी अल्फ़ा राज्य मे कई हिंसक वारदातें और हमले अंजाम देता रहा है और पिछले मामलों में भी अल्फ़ा ने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकारी थी.

ऐसे में अल्फ़ा की ओर से इन हमलों में शामिल न होने की बात के बाद उसे इन धमाकों से हटाकर नहीं रखा जा सकता है.

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