• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

कौंगो की लड़ाई में पिसती आम जनता

By Staff
|
कौंगो मे बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ा है
पूर्वी कौंगो गणराज्य में सेना के विद्रोही जनरल के समर्थकों और सेना के बीच जारी लड़ाई से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब.

इस लड़ाई के चलते क्षेत्र में लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, 20 हज़ार हाल ही में अपने घर बार छोड़ कर चल पड़े हैं. कुछ महीनो के संघर्ष विराम के बाद जनरल नुकुंडा के समर्थकों ने ये लड़ाई अगस्त में फिर से शुरू की है.

आइए इस से जुड़े कुछ सवालों के जवाब जानने की कोशिश करें.

जनवरी में जब कौंगो सरकार और विद्रोही जनरल लौरां नुकुंडा के बीच संघर्षविराम पर समझौता हो गया था तो अब ये लड़ाई क्यों भड़की?

इस लड़ाई के तार 1994 के उस जनसंहार की घटना से जुड़े हैं, जब रूआंडा में अल्पसंखय्क तूत्सी समुदाय के लगभग 8 लाख लोगों को हुतु मिलिशिया गुटों ने अंधाधुंध मारा था.

उसके बाद तूत्सी समदाय ने हुतू मिलिशिया को कौंगो गणराज्य तक खदेड़ दिया, लेकिन कौंगो गणराज्य के वद्रोही नेता जनरल लौरां नुकुंडा भी तूत्सी समुदाय से हैं और उनका कहना है कि वे अपने तूत्सी समुदाय को हुतू मिलिशिया के हमलों से बचाने के लिए ये लड़ाई लड़ रहे हैं.

अब कौंगो में सक्रिय हुतू मिलिशिया से निपटना अभी बाक़ी है. लड़ाई फिर से इसलिए भड़की क्यों कि कौंगो सरकार ने ये आश्वासन दिया था कि हुतू विद्रोहियों को तू्त्सी कबीलों पर हमलों के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देगी लेकिन ये कोरा वादा ही निकला है, इसलिए जनरल नुकुंडा ने फिर से युद्ध का बिगुल बजा दिया.

एक वजह तो ये है, दूसरे ये भी माना जाता है कि पूर्वी कौंगो गणराज्य में सोना जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में हैं इसीलिए कुछ लोगों का ये कहना है कि दोनों पक्ष इन संसाधनों पर कब्ज़े की लड़ाई लड़ रहे हैं.

तो क्या जनरल नुकंडा को इस लड़ाई में कहीं से मदद मिल रही है?

कौंगो सरकार का कहना है कि रुआंडा ही अपने सैनिकों और भारी हथियारों से जनरल नुकुंडा की मदद कर रहा है, लेकिन रुआंडा इससे इंकार करता है.

लेकिन ये हो सकता है कि रुआंडा जनरल नुकुंडा के ज़रिये कौंगो गणराज्य पर हुतू मिलिशिया से हथियार डलवाने के लिए दबाव बनाना चाहता हो.

जिस व्यापक तौर पर ये लड़ाई भड़की है, कौंगो से हज़ारों लोग विस्थापित हो रहे हैं, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र क्या कर रहा है?

यही सवाल कौंगो की जनता भी पूछ रही है. कुछ लोगों की राय ये है कि कौंगो में संयुक्त राष्ट्र के एक लाख 70 हज़ार शांतिरक्षक सैनिक सैलानियों की तरह रह रहे हैं, और हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के कौंगो मिशन का कहना है कि गोमा में विद्रोहियों की बढ़त रोकने के लिए लड़ाकू हेलिकॉप्टर भेजे गए हैं, और अतिरिक्त शांतिसैनिकों को को भी भेजा जा रहा है.

इस लड़ाई के दौरान विस्थापित हुए लोगों का क्या होगा?

यही चिंता राहत कर्मियों का सबसे बड़ा सरदर्द है कि इलाके में दसियों हज़ारों लोग विस्थापित हो गये हैं, जिन्हें मदद की ज़रूरत है.

गोमा से भागे हुए लोग खुले आसमान के नीचे सोते हैं और खाने पीने के लिए या तो वे स्थानीय निवासियों से मदद मांगते है, या राहत संस्थाओं से आस लगाते हैं.

राहत एजेंसियो का ये भी कहना है कि इनमें से कई विस्थापितों के कुपोषण से मरने का भी ख़तरा है.

इसके अलावा इतनी अव्यवस्था के बीच दोनों पक्ष नागरिकों पर अत्याचार के लिए एक दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं. खास तौर से सामूहिक बलात्कार के मामलों के लिए.

(यह जानकारी जुटाई है बीबीसी संवाददाता उर्मिला शेखावत ने)

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X

Loksabha Results

PartyLWT
BJP+000
CONG+000
OTH000

Arunachal Pradesh

PartyLWT
CONG000
BJP000
OTH000

Sikkim

PartyLWT
SDF000
SKM000
OTH000

Odisha

PartyLWT
BJD000
CONG000
OTH000

Andhra Pradesh

PartyLWT
TDP000
YSRCP000
OTH000

AWAITING

Manas Bhuniya - TMC
Midnapore
AWAITING
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more