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संसद ही बदल सकती है वर्तमान आत्महत्या कानून : ब्रिटिश अदालत

By Staff
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लंदन, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। लंदन उच्च न्यायालय ने वर्तमान आत्महत्या कानून में किसी बदलाव को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर बताते हुए संसद को इसके लिए उत्तरदायी बताया है।

लंदन, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। लंदन उच्च न्यायालय ने वर्तमान आत्महत्या कानून में किसी बदलाव को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर बताते हुए संसद को इसके लिए उत्तरदायी बताया है।

वर्तमान आत्महत्या कानून में किसी बीमार व्यक्ति को आत्महत्या में सहयोग करने वाले पर मुकदमा चलाने का प्रावधान है।

दरअसल, शारीरिक व मानसिक रूप से पूरी तरह विकलांग ब्रेडफोर्ड निवासी देब्बी पुरदे ने इस बात पर अदालत से कानूनी स्पष्टीकरण की मांग की थी कि क्या उनकी आत्महत्या में मदद करने के लिए उनके पति उमर पुंते पर मुकदमा चलाया जाएगा। न्यायालय ने बुधवार को उनकी इस याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया।

पुरदे के अनुसार सार्वजनिक अभियोग निदेशक(डीपीपी) को इस मामले में स्पष्टीकरण देने का कानूनी अधिकार है।

समाचार पत्र इंडिपेंडेंट के अनुसार न्यायमूर्ति स्कॉट बेकर व ऐकेन्स की खंडपीठ ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला मानते हुए मामले में कोई राय देने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में कानून की नई सीमाएं तय करने का अधिकार सिर्फ संसद को है।

ज्ञात हो कि इंग्लैंड व वेल्स में आत्महत्या के लिए उकसाने या मदद करने वाले को 14 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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