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परिवार गंवा चुकी मनीषा पहनना चाहती है वर्दी

By Staff
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नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। आज से तीन वर्ष पहले जब दिल्ली धमाकों से दहल उठी थी तो 12 वर्षीय मनीषा का पूरा परिवार ही उजड़ गया था। परंतु अब वह पुलिस अधिकारी बनकर आतंकवाद पर लगाम लगाना चाहती है।

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। आज से तीन वर्ष पहले जब दिल्ली धमाकों से दहल उठी थी तो 12 वर्षीय मनीषा का पूरा परिवार ही उजड़ गया था। परंतु अब वह पुलिस अधिकारी बनकर आतंकवाद पर लगाम लगाना चाहती है।

मनीषा ने आईएएनएस को बताया, "मैं एक पुलिस अधिकारी बनना चाहती हूं। मैं उन आतंकवादियों को हथकड़ी पहनाउंगी जो निर्दोष लोगों की जान लेते हैं।"

दरअसल 29 अक्टूबर 2005 को सरोजिनी नगर मार्केट में हुए विस्फोट में मनीषा के पिता माइकल, मां सुनीता और भाई अलवीन की मौत हो गई थी।

फिलहाल वह छठी कक्षा में पढ़ती है और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डेन कालोनी में अपने दादा-दादी के साथ रहती है।

उसके दादा भगवानदास कहते हैं कि मुआवजे के रूप में मिली 7,50,000 रुपये की रकम को हमने मनीषा के नाम से बैंक में जमा करा दिया है लेकिन अब तक मनीषा के पिता की मौत की एवज का मुआवजा नहीं मिला क्योंकि उनका शव बरामद नहीं हो सका था।

मनीषा और उसके दादा-दादी को ढेर सारी वित्तीय मुश्किलों का सामना पड़ता है लेकिन उनकी पेरशानी कोई सुन नहीं रहा। उसकी दादी सलीना कहती हैं कि वह अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पास भी पहुंची थीं लेकिन घंटों इंतजार करवाने के बाद भी वह उनसे नहीं मिलीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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