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नैनो परियोजना को दूसरी जगह ले जाना दुखद अनुभव : मनमोहन

By Staff
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प्रधानमंत्री के विशेष विमान एयर इंडिया वन से, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। टाटा समूह की महत्वाकांक्षी नैनो कार परियोजना को पश्चिम बंगाल से गुजरात ले जाने के लिए बाध्य करने वाली परिस्थितियों पर खेद जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि औद्योगीकरण के साथ-साथ किसानों को भूमि का लाभकारी मुआवजा देने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री के विशेष विमान एयर इंडिया वन से, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। टाटा समूह की महत्वाकांक्षी नैनो कार परियोजना को पश्चिम बंगाल से गुजरात ले जाने के लिए बाध्य करने वाली परिस्थितियों पर खेद जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि औद्योगीकरण के साथ-साथ किसानों को भूमि का लाभकारी मुआवजा देने की जरूरत पर जोर दिया।

चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित एशिया-यूरोप बैठक (एएसईएम) की सातवीं शिखर बैठक से लौटते समय अपने विशेष विमान में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "यह एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश है और जिन हालात में रतन टाटा (टाटा समूह के अध्यक्ष) को अपनी परियोजना दूसरी जगह ले जानी पड़ी, वह निश्चित तौर पर दुखद है।"

यह पहला अवसर है जब सिंह ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के लंबे आंदोलन के बाद नैनो कारखाने को गुजरात ले जाने के टाटा मोटर्स के फैसले पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी की है।

सिहं ने कहा, "उद्यमी अपने संयंत्र की जगह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं और बाजार अर्थव्यवस्था में यह सब होता है। ये फैसले अनिच्छुक उद्यमियों पर थोपे नहीं जा सकते।"

उन्होंने कहा, यह दुखद इसलिए भी है क्योंकि पश्चिम बंगाल में काफी काम किया जा चुका था और नैनो को बाजार में उतारने की तारीख तय हो चुकी थी। उस प्रक्रिया में विलंब हो गया। इसलिए कुछ हद तक यह दुखद अनुभव रहा।

सिंह ने कहा कि सिंगुर का अनुभव बड़ी परियोजनाएं शुरू करने वाले उद्यमियों के लिए आघात नहीं है लेकिन एक उचित संतुलन बनाना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं कहना चाहता हूं कि भारत को औद्योगीकरण की जरूरत है। औद्योगीकरण के बिना हम अपनी रोजगार अथवा विकास संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं खोज सकते। असली मसला है कि किन शर्तों पर भूमि हासिल की जाएगी। उसे ऐसे दाम पर अधिगृहीत नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसान असंतुष्ट हों।"

उन्होंने कहा कि उद्योग को विस्तार करते समय किसानों का ध्यान रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, किसानों को उचित मुआवजा देने और उस उद्यम में हिस्सेदारी देने के प्रयास बढ़ाए जाने चाहिए, जो अधिगृहीत भूमि पर लगाया जा रहा हो।

उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण किया जाना चाहिए लेकिन गरीब किसानों के हितों से समझौता करके नहीं। उन्हें अधिगृहीत की जाने वाली भूमि का उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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