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मंदी की आशंका से बाज़ार का गिरना जारी

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एशियाई शेयर बाज़ार भी लगातार गिर रहे हैं
वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका से अमरीकी और यूरोपीय शेयर बाज़ार में फिर गिरावट आई है. इसके बाद एशिया के बाज़ार भी गिरावट के साथ खुले हैं. इसके बाद एशिया के बाज़ार भी गिरावट के साथ खुले हैं. जापान में शेयर बाज़ार सात और दक्षिण कोरिया में छह प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले हैं.

कुछ बड़ी अमरीकी कंपनियों में नौकरियों में कटौती की ख़बरों और कई बड़ी कंपनियों के ख़राब तिमाही नतीजों के चलते बाज़ार का विश्वास डगमगाया हुआ दिखा.

अमरीका में व्हाइट हाउस में दुनिया भर के नेताओं का एक सम्मेलन करने की घोषणा की गई है लेकिन इस घोषणा से भी बाज़ारों को आश्वस्त करने में सफलता नहीं मिली है.

अगले महीने होने वाले इस सम्मेलन में अब तक उठाए गए आर्थिक क़दमों की समीक्षा की जाएगी और संकट को गहराने से रोकने के लिए क़दम उठाने की घोषणा की जाएगी.

पश्चिमी बाज़ार में गिरावट

याहू और दवा कंपनी मर्क में कर्मचारियों की संख्या कम किए जाने की ख़बर ने अमरीकी और यूरोपीय बाज़ार की चिंता बढ़ा दी है. वॉल स्ट्रीट के डाउ जोन्स इंडेक्स में कारोबार 5.7 प्रतिशत यानी 514 अंकों की गिरावट के साथ 8,519 अंकों पर बंद हुआ.

अमरीकी कंपनियों के तिमाही नतीजों का भी असर बाज़ार पर हुआ है. तो दूसरी ओर लंदन के संवेदी सूचकांक में 4.5 प्रतिशत और जर्मनी के संवेदी सूचकांक में भी 4.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

माना जा रहा है कि निवेशकों पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के गवर्नर मेर्विन किंग के बयानों का भी असर हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसा दिखता है कि ब्रिटेन 16 सालों में पहली आर्थिक मंदी का सामना करने जा रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और तांबे की घटती क़ीमतों के चलते भी बाज़ार में गिरावट आई है. कच्चे तेल की क़ीमतें 16 महीनों के न्यूनतम स्तर तक गिरकर 66.66 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची है.

जापान में बाज़ार संवेदी सूचकांक निक्केई में सात प्रतिशत की गिरावट के साथ खुला है. जबकि दक्षिण कोरिया में शुरुआती कारोबार में संवेदी सूचकांक छह प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले हैं.

जापान में शेयर बाज़ार पर जहाँ अमरीका और यूरोप के बाज़ार का असर था वहीं इस पर इस ख़बर का भी असर पड़ा कि पिछले साल जापान के व्यावसाय में 94 प्रतिशत की कमी आई है. इस कमी का कारण निर्यात में कमी और ऊर्जा आयात की बढ़ती क़ीमतों को बताया जा रहा है.

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