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संसद के दोनों सदनों में हंगामा

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तमिनाडु के सांसद श्रीलंका में तमिलों की सुरक्षा पर सर्वदलीय बैठक कर केंद्र को धमकी दे चुके हैं
भारतीय संसद में मंगलवार को भारी हंगामे के बीच लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चल पाई. तमिलनाडु के सांसदों ने लोकसभा में ख़ासा हंगामा किया है.

लोकसभा में कार्यवाही के दौरान तमिलनाडु के सांसद शोर करते हुए सदन के बीचोंबीच आ खड़े हुए. ग़ौरतलब है कि हाल में तमिलनाडु के सांसदों ने एक सर्वदलीय बैठक कर श्रीलंका में सेना और तमिल चरंपंथी संगठन एलटीटीई के बीच भीषण लड़ाई पर चिंता जताई थी.

उन्होंने ये घोषणा भी की थी कि भारत वहाँ संघर्षविराम कायम करने के लिए कदम उठाए और यदि दो हफ़्ते में वहाँ संघर्षविराम नहीं होता तो तमिलनाडु के सभी सांसद संसद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

सोमनाथ की अपील

मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कई बार तमिलनाडु के सांसदों से अपील की कि वे उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा देंगे लेकिन उनकी अपील का सांसदों पर कोई असर नहीं हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

सोमनाथ चटर्जी का कहना था, "आप केवल एक मिनट के लिए अपनी सीटों पर लौट जाएँ. मैं आप सभी की बात सुनने के लिए तैयार हूँ."

आप केवल एक मिनट के लिए अपनी सीटों पर लौट जाएँ. मैं आप सभी की बात सुनने के लिए तैयार हूँ. लेकिन ऐसा लगता है कि आप अपनी बात रखना ही नहीं चाहते हैं. आप केवल शोर करना चाहते हैं. मैं सदन की कार्यवाही स्थगित करता हूँ
लेकिन लोकसभा अध्यक्ष की बात का जब सांसदों पर कोई असर नहीं हुआ तब उन्हें झल्ला कर ये भी कहना पड़ा, "आप अपनी बात रखना ही नहीं चाहते हैं. आप केवल शोर करना चाहते हैं. मैं सदन की कार्यवाही स्थगित करता हूँ." इसके बाद दोपहर को लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरु हुई.

उधर राज्यसभा में भी यही हाल था और सांसदों के अपनी सीटों पर खड़े होने और शोर करने के कारण राज्यसभा के चेयरमैन हामिद अंसारी को सदन का कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. लेकिन दोपहर कार्यवाही दोबारा शुरु होने के बाद भी सांसदों का शोर होता रहा.

भारतीय संसद का सत्र शुक्रवार को शुरु हुआ था और पहले ही दिन देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक दंगों के मुद्दे पर राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ था.

संभावना है कि संसद के इस सत्र में कई ऐसे मुद्दे सामने आने वाले हैं जिनमें सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने होगा. इनमें ईसाइयों के ख़िलाफ़ कर्नाटक-उड़ीसा में हिंसा, भारत-अमरीका परमाणु समझौता, चरमपंथी और देश में कई जगह हुए धमाके शामिल हैं.

देश में पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है और विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश से पीछे नहीं हटना चाहेगा.

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