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मनमोहन सिंह की जापान, चीन यात्रा

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मनमोहन सिंह की यात्रा के दौरान वित्तीय संकट पर चर्चा होगी
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को जापान और चीन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं. इस दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर वार्ता होगी.
जापान की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने पर वार्ता होगी.

इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 24 अक्तूबर से बीजिंग में शुरु हो रहे एशिया-यूरोप मीटिंग यानि आसेम शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन रवाना होंगे. भारत और जापान के बीच तेज़ी से बढते व्यापार संबंधों का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान यह उनकी दूसरी जापान यात्रा है.

परमाणु मुद्दे पर कड़ा रवैया होने के बावजूद जापान ने परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों की बैठक में भारत का समर्थन किया था. साथ ही जापान से दूसरे देशों को आर्थिक विकास के लिए दिए जाने वाले ऋण का 30 प्रतिशत हिस्सा भारत को मिलता है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा कि पिछले साल जापान के साथ दो देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी के लिए जो कार्ययोजना बनाई गईं थीं, उसी को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जापान के प्रधानमंत्री तारो आसो के साथ चर्चा करेंगे.

इसके अलावा भारत और जापान के उद्योगपतियों के सम्मेलन को भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संबोधित करेंगे.

पिछले साल जापान के साथ दो देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी के लिए जो कार्ययोजना बनाई गईं थीं, उसी को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जापान के प्रधानमंत्री तारो आसो के साथ चर्चा करेंगे
भारतीय उद्योगपतियों के दल का नेतृत्व रिलायंस इंडस्ट्रीस के प्रमुख मुकेश अंबानी करेंगे. ये दल दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को व्यापार बढ़ाने के लिए अपने सुझाव भी देगा.

दोनों देशों ने आगामी दो वर्षों में व्यापार को 20 अरब डालर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही भारत जापान के साथ औद्योगिक टेक्नालॉजी में भी सहायता की उम्मीद रखता है.

मगर साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री आसो के साथ वर्तमान आर्थिक संकट का हल निकालने के लिए भी चर्चा करेंगे. अपनी जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री जापान के सम्राट अकिहितो और पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे.

बीजिंग में सम्मेलन

इसके बाद 24 अक्तूबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बीजिंग रवाना होंगे जहां वो आसेम के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. उल्लेखीय है कि आसेम यूरोपीय संघ के 27 और एशिया के 13 देशों का आर्थिक गुट है. लेकिन भारत पहली बार शिखर सम्मलेन स्तर पर इसमें भाग ले रहा है.

आसेम के नेताओं के बीच विश्व में व्याप्त मौजूदा वित्तीय संकट पर ज़रूर चर्चा होगी.
आर्थिक दृष्टि से ये इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का 50 प्रतिशत व्यापार आसेम के सदस्य देशों के साथ होता है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया सचिव एन रवि का कहना है कि ये सम्मेलन एक विशेष माहौल में हो रहा है.

एन रवि कहते हैं कि आसेम के नेताओं के बीच विश्व में व्याप्त मौजूदा वित्तीय संकट पर ज़रूर चर्चा होगी. साथ ही धरती के बढते तापमान खाद्य सुरक्षा और संतुलित विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा.

इधर भारतीय संसद में भी मौजूदा वित्तीय संकट से प्रभावित भारतीय बाज़ार पर गरमागरम बहस चल रही है. चीन से लौटने के बाद प्रधानमंत्री सऊदी अरब की यात्रा पर आठ नवंबर को रवाना हो जाएंगे.

ऐसे में प्रधानमंत्री की लंबी विदेश यात्राओं के कारण उनकी संसद से अनुपस्थिति पर भी उंगलियां उठ सकती हैं.

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