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बसपा व माकपा सदस्यों ने किया लोकसभा से बहिर्गमन (लीड-2)

By Staff
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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। विश्वास मत के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक सांसद को सरकार के पक्ष में मतदान के लिए धमकाए जाने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी द्वारा दी गई व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट करते हुए बसपा ने और उड़ीसा में हिंसा पर बोलने का मौका न दिए जाने से नाराज मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को लोकसभा से बहिर्गमन किया।

दोपहर दो बजे जैसे ही सदन बैठा, बसपा ने चटर्जी पर सदस्यों के हितों की रक्षा न करने का आरोप लगाया। बसपा सांसदों ने मांग की विश्वास मत के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों द्वारा धमकाए जाने के मामले की जांच संसद की विशेषाधिकार समिति से कराई जाए। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने बसपा सांसदों की मांग को ठुकरा दिया।

इतने में सभी बसपा सांसद अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। लेकिन चटर्जी ने जब उनकी एक न सुनी तो बसपा सांसदों ने सदन का बहिष्कार किया।

इस दौरान माकपा नेता बासुदेब आचार्य ने उड़ीसा में फैली हिंसा के मुद्दे को उठाना चाहा। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "आपको जब बोलने का मौका दिया गया तो आपकी ही पार्टी के उपनेता ने आपको बोलने नहीं दिया। अब आपको बाद में बोलने को मौका दिया जाएगा।"

माकपा नेता अध्यक्ष के आश्वासन से असंतुष्ट दिखें और अंतत: उन्होंने भी सदन से वाकआउट किया।

इससे पहले दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही अध्यक्ष ने सबसे पहले विधायी कामकाज निपटाए। इसके बाद उन्होंने सदने में बसपा के नेता सांसद ब्रजेश पाठक की शिकायत पर अपनी व्यवस्था दी।

लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर नाखुशी जताते हुए पाठक ने इस मामले को विशेषाधिकार समिति के सौंपे जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले में राजनीति की बू आ रही है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए उनकी मांग ठुकरा दी कि अध्यक्ष के फैसले पर सवाल उठाया नहीं जा सकता। इस विषय पर हंगामे को देखते हुए चटर्जी ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थिगत कर दी।

आज सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही प्रांरभ हुई तो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसदों ने श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ हो रही हिंसा का मामला उठाया। डीएमके सदस्य श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ जारी हिंसा रोके जाने और इस मामले में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सांसदों से अपील की कि वे प्रश्नकाल चलने दें लेकिन द्रमुक सांसदों ने उनकी एक न सुनी। अलबत्ता अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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