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वित्तीय संकट का असर, लेकिन चिंता की बात नहीं : मनमोहन (लीड-2)

By Staff
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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मौजूदा वैश्विक वित्तीय संकट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि इस संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में सोमवार को 10 मिनट के अपने बयान में कहा, "देश का बैंकिंग क्षेत्र वैश्विक वित्तीय संकट से सीधे-सीधे प्रभावित नहीं हुआ है और मजबूत स्थिति में है।" उन्होंने कहा, "डरने की कोई वजह नहीं है। यह समान उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए दृढ़ कार्रवाई करने का समय है।"

अमेरिका और यूरोप के बैंकों की माली हालत पतली होने और उनके दिवालिया होने पर चिंतित न होने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "मैं विश्वास दिलाता हूं कि बैंकों में जमा पैसा सुरक्षित है।" उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट का प्रभाव कम से कम करने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं।

मनमोहन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज ही रेपो दर में 100 आधार अंकों यानी एक प्रतिशत की कटौती की है। इससे बैंकों को अतिरिक्त 'एसएलआर प्रतिभूतियों' के बदले किफायती दरों पर ऋण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले का स्वागत करती है। इस कदम से बाजार में पर्याप्त तरलता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने की थी। उन्होंने कहा, "मुझे सदन को यह बताने में खुशी हो रही है कि हमारी बैंकिंग प्रणाली पर अमेरिकी सब-प्राइम संकट का सीधा प्रभाव नहीं पड़ा है। जोखिम वाले अन्य परिसंपत्तियों से संबंधित उनकी समस्याएं भी कम ही हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों के लिए ऋण छूट और राहत योजना के तहत सरकार ने बैंकों को 25,000 करोड़ रुपये मुहैया कराने की व्यवस्था की है। बाजार में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के उपायों के तहत सरकार ने कारपोरेट बांड में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से निवेश की सीमा तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर छह अरब डॉलर कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार भलीभांति जानती है कि पूंजी बाजार में पर्याप्त तरलता उपलब्ध कराने के लिए ये उपाय काफी नहीं हैं। तरलता के पर्याप्त उपलब्धता का सीधा अर्थ यह होना चाहिए कि उद्योग, कारोबार और व्यापार के लिए पर्याप्त ऋण उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा, "आरबीआई और सरकार बाजार में ऋण प्रवाह की स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। हम भरोसा दिलाना चाहते हैं कि बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त धन मुहैया कराए जाएंगे, जिससे वास्तव में ऋण की उपलब्धता बढ़ेगी। यदि जरूरत पड़ी तो हम इस तरह के कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएंगे।"

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री का यह बयान हाल के दिनों में शेयर बाजारों में मची अफरा तफरी के बाद आया है। पिछले हफ्ते बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक 'सेंसेक्स' 10,000 के स्तर के नीचे चला गया। लगभग छह महीने पहले यह 21,000 के स्तर से भी ऊपर था।

मौजूदा वित्तीय संकट के भय से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और घरेलू कारोबारियों ने खूब बिकवाली की। नतीजतन पिछले एक महीने में देश के प्रमुख सूचकांकों में 25 प्रतिशत और पिछले 52 हफ्तों में 45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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