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रेल कोच फैक्टरी : रायबरेली में दीवाली जैसा माहौल

By Staff
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रायबरेली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा रायबरेली रेल कोच फैक्टरी की जमीन वापस करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पूरे जिले में मिठाइयां बांटी जा रही हैं खासकर लालगंज में दीवाली से पहले ही दीवाली जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब उनका सपना साकार होगा और उनके बच्चों का भविष्य संवरेगा।

रायबरेली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा रायबरेली रेल कोच फैक्टरी की जमीन वापस करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पूरे जिले में मिठाइयां बांटी जा रही हैं खासकर लालगंज में दीवाली से पहले ही दीवाली जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब उनका सपना साकार होगा और उनके बच्चों का भविष्य संवरेगा।

प्रदेश सरकार के जमीन आवंटन रद्द करने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले अवनींद्र पांडे ने आईएएनएस को बताया, "अर्से से इस क्षेत्र के लोगों ने सपना संजोया था कि उनके दरवाजे खुशहाली आएगी। क्षेत्र के लोगों को अब मूलभूत सुविधाएं तो मिलेंगी ही साथ ही रोजगार के द्वार खुल जाएंगे।"

पांडे ने कहा कि आम जनता फैक्टरी चाहती थी लेकिन सूबे की मुख्यमंत्री राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोगों के सपनों को कुचल रही थी। लेकिन जल्द ही उन्हें जनभावनाओं का अहसास हो गया।

लालगंज क्षेत्र के ऐहार गांव के 50 वर्षीय किसान गंगाबिशुन ने बताया, "पुरखों ने जो ख्वाब देखा अब वह साकार होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय प्रधानमंत्री इंदिया गांधी ने यहां कृषि विश्वविद्यालय खोलने का वायदा किया था लेकिन सोनिया ने तो उससे बड़ा काम कर दिया है।"

स्थानीय विधायक अशोक सिंह ने कहा कि रायबरेली के लोग बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने राजनीतिक दलों की सीमा से उठकर रेल कोच फैक्टरी के पक्ष में आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि जनआंदोलन के भय से राज्य सरकार जमीन वापस करने को विवश हो गई।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में देश का तीसरी रेल कोच फैक्टरी रायबरेली में स्थापित करने का निर्णय लिया था। इस साल मई में राज्य सरकार की तरफ से रेलवे को 400 एकड़ भूमि सौंप दी गई थी। 14 अक्टूबर को जब भूमि पूजन की घड़ी नजदीक आई तो मायावती सरकार ने अप्रत्याशति तरीके से आवंटन रद्द कर दिया।

इस निर्णय के बाद पूरे रायबरेली में तूफान खड़ा हो गया। लोग सड़कों पर उतर आए। कांग्रेस नेताओं को पीछे करके आम जनता आंदोलन में कूद पड़ी। इस बीच मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा, तो न्यायालय ने स्थगनादेश जारी कर दिया। इससे राज्य सरकार 'बैकफुट' पर आ गई और उसने जमीन वापस करने का फैसला किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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