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अंतिम साँस भारत में लेने की इच्छा

By हफ़ीज़ चाचड़
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    ये पाँचों बुज़ुर्ग जीवन के अंतिम पड़ाव में भारत लौटना चाहते हैं
    अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ दक्षिणी भारत में मोपला विद्रोह शुरु होने के बाद पाँच लोगों की किस्मत उन्हें पाकिस्तान खींच लाई लेकिन अब वे वतन वापसी चाहते हैं.

    यह शब्द हैं 85 वर्षीय हाजी मोहम्मद के जिनका पूरा परिवार भारत में है और वे कराची में उन पाँच बूढ़े शख़्सों के साथ रहते हैं जो मज़दूरी के लिए कराची पहुँचे थे.

    जब आदमी बूढ़ा हो जाता है तो उनकी इच्छा होती है कि आख़िरी समय वह अपने परिवार को साथ गुज़ारे. ऐसी ही इच्छा इन पांच बूढ़े आदमियों की है जो अपने जीवन का आख़िरी वक्त भारत में अपने परिवार के साथ गुज़ारना चाहते हैं. लेकिन दोनों देशों के वीज़ा नियम उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहे हैं.

    दक्षिण भारत में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ मोपला विद्रोह छिड़ने के बाद कई लोग उत्तर भारत और मध्य पूर्व के देशों में रोज़गार के लिए निकले.

    विभाजन के बाद बहुत से लोग इन इलाकों से कराची पहँचे और यहाँ मज़दूरी की. इन्हीं लोगों में पांच एसे बूढ़े व्यक्ति हैं जो आज भी कराची के भीड़-भाड़ वाले इलाक़े सदर की एक पुरानी इमारत में रहते हैं.

    हाजी मोहम्मद भारत की नागरिकता चाहते हैं

    इन पांच लोगों की नम आँखें और चेहरे अलग-अलग और दुख भरी कहानियाँ बयान करते हैं. 85 वर्षी हाजी मोहम्मद का जन्म केरल के ज़िले कोझीकोड़ में हुआ जो उन दिनों कालीकट के नाम से जाना जाता था.

    विभाजन के समय वे गुजरात के जामपुर शहर में मज़दूरी करते थे और वहाँ से वे नौका के ज़रिए अवैध रूप से मध्य पूर्व के देश बहरीन गए. 15 साल बहरीन में रहने के बाद किस्मत उन्हें पाकिस्तान खींच लाई

    पाकिस्तान की राह

    हाजी मोहम्मद बताते हैं, "क़ुदरत ने मेरे को पाकिस्तान में धकेल दिया. हम बिना पासपोर्ट के पकड़े गए. किसी ने बोला कि भारतीय नहीं बोलने का, भारतीय बोलेगा तो तुमको जेल में डालेंगे."

    हाजी ने कहा कि फिर उन्होंने अपने आप को पाकिस्तानी कह कर कराची में जगह जमाई.

    क़ुदरत ने मेरे को पाकिस्तान में धकेल दिया. हम बिना पासपोर्ट के पकड़े गए. किसी ने बोला कि भारतीय नहीं बोलने का, भारतीय बोलेगा तो तुमको जेल में डालेंगे
    हाजी मोहम्मद अब पाकिस्तान के नागरिक हैं और पाकिस्तान में उनका कोई रिश्तेदार नहीं है. वे कई बार वीज़ा लेकर अपने बेटे से मिलने केरल के शहर चलियाम जा चुके हैं.

    वे कराची में मज़दूरी नहीं कर सकते और अपने जीवन का आख़िरी समय अपने बेटे के साथ बिताना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि नागरिकता के लिए भारत सरकार को चिट्ठी लिखी है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है.

    हाजी मोहम्मद के साथ एक और बूढ़ा शख़्स शेख़ मोहम्मद भी रहते हैं जो केरल के कोलाम ज़िले के हैं. उन्होंने बताया कि वे 1948 में मुंबई से होते हुए कराची पहुँचे और यहाँ होटलों में मज़दूरी की.

    आख़िरी इच्छा

    शेख़ मोहम्मद ने शादी तो नहीं की लेकिन उन की ख़्वाहिश है कि वे भी अपने जीवन के आख़िरी दिन भारत में बिताएँ.

    शेख़ मोहम्मद बुढ़ापे के कारण मज़दूरी करने में असमर्थ हैं

    शेख़ मोहम्मद सेना में भर्ती होना चहते थे लेकिन उनका यह सपना साकार नहीं हो सका. भारत को अपना मुल्क कहने वाले इस शख़्स ने बताया कि पाकिस्तान में कोई रिश्तेदार नहीं है लेकिन भारत में बहुत से हैं.

    एक और बुज़ुर्ग शख़्स जिन्होंने अपना नाम ममोटी बाताया कराची में एक दुकान पर काम करते थे. उन्होंने बताया कि अब उम्र बढ़ने की वजह से मज़दूरी नहीं होती.

    उन्होंने अपने बारे में कहा, "भारत में केवल हमारी पत्नी है. वह सुबह को सारा दिन अपने घर में रहती है और रात को अपने भाई के घर जाती है."

    उन्होंने कहा कि पत्नी बिमार रहने लगी है और वे चाहते हैं कि अब आख़िरी समय अपनी पत्नी के साथ बिताएँ.

    इन पाँचों बुज़ुर्गों की माँग है कि भारत सरकार उन्हें उनके परिवार के साथ रहने की अनुमति दे.

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