• search

पिछड़ता जा रहा है भागलपुर का सिल्क उद्योग

By Staff
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    भागलपुर, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के भागलपुर शहर की पहचान अपने रेशम उद्योग के लिए है, परंतु आज इस शहर का पारंपरिक रेशम उद्योग आधुनिक तकनीकों के आगे पिछड़ता जा रहा है।

    यहां का रेशम उद्योग करीब 12,500 पावरलूमों और लगभग 11,600 हस्तकरघों पर टिका है। इस उद्योग से जिले के लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

    बिहार बुनकर कल्याण समिति के सदस्य आलीम अली का मानना है कि बिहार में रेशम उद्योग से बड़ा कोई उद्योग नहीं है। उन्होंने आईएएनएस को बताया, "इस उद्योग से देश को करीब ढाई सौ करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। सरकार बुनकरों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं पर भी अमल कर रही है।"

    उन्होंने कहा, "सरकार बुनकरों को बिजली के प्रति यूनिट पर डेढ़ रुपये की सब्सिडी देने वाली है और बुनकरों के करीब दो करोड़ रुपये के ऋण माफ कर चुकी है।"

    उधर, उद्योग जगत से जुड़े बुनकरों का मानना है कि न तो उन्हें रियायती दर पर रेशम का सूत मिलता है और न ही रंग या अन्य कच्चा सामान। भागलपुर के हसनाबाद के मोहम्मद जफर अंसारी कहते हैं, "यह उद्योग बिजली नहीं रहने की वजह से जनरेटर की बूते चल रहा है। इसके उत्पादन का खर्च बढ़ रहा है। लागत दर में लगातार वृद्धि होने से यहां के बुनकर व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।"

    अफरोज अंसारी की माने तो यहां के बुनकरों को देश-विदेश में ताजातरीन डिजाइनों व प्रचलित रंगों की जानकारी है लेकिन उन्हें प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है।

    भागलपुर स्थित रेशम संस्थान के प्राचार्य अजय कुमार महतो के मुताबिक बुनकरों को राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के बुनकरों को उन्नत किस्म के कपड़ों की बुनाई और रंगाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बुनकरों के बच्चों को छात्रवृति के साथ-साथ रियायती दर पर बिजली सहित कई योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

    **

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more