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श्रीलंका मामले पर उच्चायुक्त तलब

By सुशीला सिंह
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    श्रीलंका में जारी सैन्य संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने श्रीलंका के उच्चायुक्त सीआर जयसिंघे को तलब किया.

    विदेश सचिव ने मुलाक़ात के दौरान उच्चायुक्त सीआर जयसिंघे को सलाह दी कि श्रीलंका सरकार एलटीटीई से निपटने के लिए जो क़दम उठा रही है उसके बजाय बातचीत एक अच्छा समाधान होगा.

    शिवशंकर मेनन का कहना था कि वहाँ लगातार जारी संघर्ष से भारत की चिंता बढ़ी है. साथ ही उन्होंने कहा कि श्रीलंका को नागरिकों का सम्मान करना चाहिए और हमलों से उनके बचाव का इंतजाम करना चाहिए.

    उनका कहना था कि युद्ध क्षेत्र में आम जनता की स्थिति बिगड़ती जा रही है और बड़ी संख्या में तमिल मारे जा रहे हैं. इससे मानवीय त्रासदी की स्थिति उत्पन्न हो गई है.

    उनका कहना था कि प्रभावितों को पर्याप्त खाद्य समाग्री और ज़रूरत के सामान मुहैया करवाया जाना चाहिए. मछुआरों की समस्या से ख़ासी चिंतित सरकार का कहना था कि भारतीय मछुआरों को परेशान किया जा रहा है, उन्हें मारा जा जाता है जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए.

    इससे पहले भी कई स्तर पर सरकार इस मुद्दे को उठा चुकी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जातीय संकट के समाधान के लिए बातचीत का सुझाव दे चुके है तो विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी भी कह चुके है कि इस समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए जो बन पड़ेगा वो किया जाएगा.

    विवाद

    पडोसी देश श्रीलंका में शांति भारत और सत्तारुढ़ गठबंधन के लिए भी ज़रूरी है क्योंकि यूपीए की सहयोगी पार्टी के डीएमके के सरकार में सात मंत्री हैं जो श्रीलंका में तमिलों की स्थिति को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए है.

    एलटीटीई और सरकारी सेना के बीच संघर्ष जारी है

    डीएमके की राज्यसभा सांसद और डीएमके नेता करुणानिधि की बेटी कनीमोली ने पहले ही अपना इस्तीफ़ा अपने पिता और मुख्यमंत्री करुणानिधि को भेज दिया है.

    डीएमके और कुछ अन्य राजनीतिक दलों का कहना है श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाई से वहाँ के तमिलों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनके अनुसार निर्दोष तमिलों को मारा जा रहा है.

    श्रीलंका में सेना तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के ख़िलाफ़ पिछले कुछ महीनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में लगी हुई है और सेना का कहना है कि यह लड़ाई अब निर्णायक दौर में है.

    इस युद्ध के चलते देश के उत्तरी इलाक़े में लाखों तमिलों को विस्थापित होना पड़ा है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई प्रमुख सहायता एजेंसियों के कर्मचारी इस इलाक़े को छोड़कर जा चुके हैं.

    गौरतलब है कि एक करोड़ से भी ज़्यादा तमिल वहाँ रहते हैं. भारत का मानना है कि श्रीलंका में शांति और स्थिरता के लिए जातीय समस्या का हल बातचीत से निकाला जाए जो दोनों तमिल और सिंहला को मंज़ूर होना चाहिए.

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