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भारत भेजा जा रहा है ब्रिटेन का कूड़ा

By Staff
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    पॉल शरमन यह जानकर हैरान हैं कि उनकी फेंकी हुई रद्दी भारत में कैसे पहुँच गई
    पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने दूसरे देशों का कूड़ा भारत भेजे जाने पर आपत्ती जताई है. उनका कहना है कि यह पर्यावरण और सामाजिक रूप से ठीक नहीं है.

    पॉल शरमन ने अपने घर भेजी गई एक अवांछित चिट्ठी काउंसिल के कूड़ा इकट्ठा करने वाले डिब्बे में डाल दी थी.

    पॉल शरमन यह जानकर हैरान हैं कि वो चिट्ठी किस तरह पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को तमिलनाडु में मिली, वो भी एक ऐसे कुँए में जिसका इस्तेमाल नहीं होता है यानी जो सूखा पड़ा है.

    पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पर्यावरण की नज़र से ही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी ठीक नहीं है कि ब्रिटेन का कूड़ा भारत भेजा जाए.

    गंभीर समस्या

    उधर, लीड्स नगर निगम का कहना है कि उसके यहाँ से रीसाइक्लिंग होने वाला कोई भी पदार्थ भारत नहीं भेजा गया है.

    पॉल शरमन ने बीबीसी से कहा कि यह जानकर मुझे काफ़ी धक्का लगा है कि मेरी ऐसी चिट्ठियाँ भारत में कैसे पहुँच गईं जो अवांछित रूप से मेरे घर पहुँचाई गई थीं और जिन्हें मैंने रीसाइक्लिंग के इरादे से काउंसिल के डिब्बे में डाल दिया था.

    मैं रीसाइकिल होने वाले कूड़े के बारे में नगर निगम के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करता हूँ और रद्दी कागज़ को निगम की ओर से दिए गए हरे रंग के डब्बे में डाल देता हूँ
    पॉल शरमन ने कहा, "मैं रीसाइकिल होने वाले कूड़े के बारे में नगर निगम के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करता हूँ और रद्दी क़ागज़ को निगम की ओर से दिए गए निर्धारित हरे रंग के डब्बे में डाल देता हूँ."

    उन्होंने कहा, "यह रद्दी भारत में कैसे पहुँच गई, इसके बारे में मैं कुछ नहीं जानता. यह काफ़ी दुख पहुँचाने वाली बात हैं."

    पर्यावरण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि कूड़े को रीसाइक्लिंग करने के लिए ब्रिटिश काउंसिल अनेक कंपनियों से करती है, कई बार उस रद्दी को रीसाइकिल करने के लिए भारत भेज दिया जाता है.

    निगरानी

    पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कूड़े को कहीं भेजे जाने से पहले उसमें से क़ाग़ज, प्लास्टिक और टिन के डिब्बों वग़ैरा को अलग-अलग करना होता है लेकिन कई बार ऐसा नहीं भी हो पाता है. इससे होता यह है कि जब इस तरह का कूड़ा भारत के संयंत्रों में पहुंचता है तो वह रीसाइकिल करने के लायक नहीं होता है.

    हमारे यहाँ से रीसाइक्लिंग होने वाला कोई भी पदार्थ भारत नहीं भेजा गया है
    इसका परिणाम यह होता है कि ऐसे कूड़े को तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रयोग में न लाए जाने वाले सैकड़ों मीटर गहरे कुंओं में डाल दिया जाता है.

    लीड्स नगर निगम के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि शरमन का पत्र कूड़े की छँटनी और रीसाइक्लिंग के दौरान वहाँ पहुँचा है.

    उन्होंने कहा कि रीसाइक्लिंग वाली जगह पर यह सुनिश्चित करने के लिए एक बहुत कड़ी प्रक्रिया है कि ठेकेदार अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं.

    निगम का कहना है कि शहर से एकत्र किए गए कूड़े का कुछ हिस्सा ही बाहर भेजा जाता है. क्योंकि उनमें से कुछ पदार्थों की वहाँ बहुत माँग है.

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