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सामान्य नहीं हुए हैं अदिलाबाद के हालात

By उमर फ़ारूक़
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    पिछले दिनों भैंसा शहर में दुर्गा विसर्जन जुलूस को लेकर इलाक़े में हिंसा भड़की थी.
    आंध्रप्रदेश में आदिलाबाद ज़िले के भैंसा शहर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को एक सप्ताह गुज़र चुका है लेकिन शहर में सामान्य जनजीवन बहाल नहीं हो सका है.

    यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संदेह और अविश्वास की एक दिवार उठ खड़ी हुई है.

    आदिलाबद के भैंसा शहर में अभी भी कर्फ़्यू जारी है. शहर के आसपास के ग्रामीण इलाक़ों में भय का माहौल है.

    ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह आदिलाबाद ज़िले में भड़की हिंसा में 10 लोग मारे गए थे. कई परिवारों को अपनी रोज़ी रोटी के साधन से हाथ धोना पड़ा तो कइयों को अपने आशियानों को भी खोना पड़ा था.

    पिछले शुक्रवार को राजधानी हैदराबाद से 275 किलोमीटर दूर भैंसा शहर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा उस समय भड़की जब दुर्गा विसर्जन जुलूस पंजेशाह के संवेदनशाली इलाक़े से गुज़र रहा था.

    देखते ही देखते शहर के बीचों बीच शुरू हुई ये हिंसा पंजेशाह से बाहर के इलाक़ों में फैल गई.

    शहर की शांति भंग

    बताना मुश्किल है कि दोनों तरफ से झगड़ कब शुरू हुआ, लेकिन इतना कह सकता हूँ कि इस पूरी घटना से शहर की शांति भंग हो गई है
    हिंदुओं के एक वरिष्ठ पुरोहित बबरू महाराज जो हर साल दुर्गा विसर्जन जुलूस में शामिल रहते हैं, उनका कहना है, "ये बताना मुश्किल है कि दोनों तरफ से झगड़ कब शुरू हुआ, लेकिन इतना कह सकता हूँ कि इस पूरी घटना से शहर की शांति भंग हो गई है."

    ये सांप्रदायिक हिंसा क्यों हुई और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि ये सवाल किसी हिंदू से पूछा जा रहा है या किसी मुसलमान से. हिंसा के लिए दोनों एक दूसरे को ज़िम्मेदार मानते हैं.

    पंजेशाह इलाक़े के ख़ालिद के अनुसार इस हिंसा के लिए हिंदू ज़िम्मेदार है. वो कहते हैं, "जब दुर्गा माता का जुलूस पंजेशाह की मस्जिद से गुज़र रहा था तो कट्टर हिंदूओं ने यहाँ उपद्रव मचाना शुरू कर दिया, मस्जिद के साथ बेअदबी की, मुसलमान बच्चों पर गुलाल फेंके गए, औरतों के साथ भी बेहुदा सलूक किया गया."

    जबकि पी चन्ना का कहना है, "इस शहर पर 'आतंकवादियों' की निगाह है और ये 'आतकंवादी' घटना है, ये शहर आईएसआई का अड्डा है इसलिए ऐसा हो रहा है. ''

    पुलिस की 'असफलता'

    जब दुर्गा माता का जुलूस पंजेशाह की मस्जिद से गुज़र रहा था तो कट्टर हिंदूओं ने यहाँ उपद्रव मचाना शुरू कर दिया, मस्जिद के साथ बेअदबी की, मुसलमान बच्चों पर गुलाल फेंके गए, औरतों के साथ भी बेहुदा सलूक किया गया
    दूसरे मुद्दों पर भले ही दोनों समुदायों की अलग-अलग राय हैं लेकिन दोनों इस बात से सहमत नज़र आते हैं कि पुलिस की 'असफलता' की वजह से ये हिंसा भड़क उठी.

    एक नागरिक अब्दुर रशीद का कहना है कि जब घटना घटी, उस समय कोई पुलिस वाला मौजूद नहीं था और अगर पुलिस मौजूद होती तो ये घटना नहीं घटती.

    एक सप्ताह बाद दोनों समुदाय सामान्य जीवन की शुरूआत करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इन घटनाओं ने जो जख़्म छोड़े हैं, इसको सुखने में समय लगेगा.

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