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    तरलता संकट से उबरने के लिए बैंकों को मिलेंगे 650 अरब रुपये (लीड-1)

    By Staff
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    नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक वित्तीय संकट के कारण पूंजी बाजार में पैदा तरलता संकट के समाधान के लिए बुधवार को 650 अरब रुपये बाजार में डालने की व्यवस्था की गई। इस कदम का उद्योग जगत ने स्वागत किया है।

    वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार सुबह पूंजी बाजार में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 250 अरब रुपये के पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कारपोरेट बॉन्ड बाजार में विदेशी कोषों को दोगुना कर उसे छह अरब डालर करने की भी घोषणा की।

    इसके बाद शाम को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 100 आधार अंकों यानी एक फीसदी की कटौती कर दी। आरबीआई के इस कदम से बैंकों को 40 हजार करोड़ रुपये और मिलेंगे। आरबीआई ने इससे पहले सीआरआर में डेढ़ फीसदी की कटौती की थी।

    नई दिल्ली में बुधवार को खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में चिदंबरम ने कहा, "हमारे बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है। भयभीत होने की कोई वजह नहीं है।" उन्होंने कहा कि पैकेज में 175 अरब रुपये राष्ट्रीय ग्रामीण एवं कृषि विकास बैंक (नाबार्ड) को मिलेंगे और शेष राशि अन्य बैंकों को दी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि यह पैकेज 710 अरब रुपये के किसानों की ऋण माफी योजना की वजह से बैंकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी गई है।

    कारपोरेट बांडों में विदेशी कोष सीमा को बढ़ाए जाने की घोषणा करते हुए चिदंबरम ने कहा कि तरलता मुख्य समस्या है और छह अक्टूबर से अब तक इसके समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कदमों से बाजार में पर्याप्त तरलता उपलब्ध हो सकेगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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