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राम सेतु हिन्दू धर्म का हिस्सा नहीं : सरकार

By Staff
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नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा है कि राम सेतु हिन्दू धर्म का आवश्यक व अभिन्न अंग नहीं है।

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लिखित जानकारी में दोहराया है कि सेतु समुद्रम परियोजना के तहत राम सेतु को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए अन्य विकल्पों की तलाश करने के मद्देनजर वह विशेषज्ञों का एक पैनल नियुक्त करने के सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव पर सहमत है।

सरकार ने अदालत के समक्ष माना, "भगवान राम द्वारा राम सेतु को नहीं तोड़े जाने संबंधी हिंदुओं के विश्वास को बिना किसी संदेह के प्रमाणित नहीं किया जा सका है। साथ ही यह भी साबित नहीं हुआ है कि राम सेतु के जो भी अवशेष हैं और जिसे पूजनीय बताया जाता है, वह हिन्दू धर्म का आवश्यक व अभिन्न अंग है।"

सरकार ने आगे कहा कि राम सेतु जिसे कि एडम्स ब्रीज के नाम से भी जाना जाता है, को भगवान राम ने खुद तोड़ा था जब वे श्रीलंका से वापस लौट रहे थे। सरकार ने अपनी दलील में कहा है कि वह जो तोड़ा जा चुका है, उसकी हिन्दू धर्म में पूजा नहीं हो सकती।

सरकार ने कहा, "एक ऐसी धार्मिक मान्यता व पूजा पद्धति जो कि उस धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है, संविधान के 25वें व 26वें अनुच्छेद के तहत उसकी रक्षा नहीं की जा सकती।"

सरकार ने साथ ही यह भी कहा है कि सेतु समुद्रम परियोजना का विरोध करने वाले भी यह साबित नहीं कर पाए हैं कि राम सेतु हिन्दू धर्म का आवश्यक व अभिन्न अंग है।

सरकार ने यह कहते हुए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री व राज्य विधानसभा में विपक्ष की नेता जे. जयललिता पर हमला किया कि वह राजनीतिक आधार पर इस परियोजना का विरोध कर रही है। यह उनकी ही सरकार थी जिसने 2005 के मार्च महीने में इस परियोजना को पर्यावरण संबंधी मंजूरी दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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