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आर्थिक संकट के लिए यूरोप की योजना

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अमरीकी आर्थिक संकट का यूरोपीय वित्तीय संस्थानों पर बुरा असर पड़ा है
यूरोप के नेताओं ने पेरिस में एक महत्वपूर्ण बैठक में तय किया है कि यूरोप के किसी भी बड़े वित्तीय संस्थान को दिवालिया नहीं होने दिया जाएगा. अमरीका में आए आर्थिक संकट का यूरोपीय देशों पर ज़बर्दस्त असर पड़ा है और इसी से निपटने के लिए यूरोप के नेताओं की पेरिस में बैठक हुई है..

बैठक में यह भी तय हुआ है कि मौद्रिक तरलता बनाए रखने यानी बाज़ार में पैसों की कमी को रोकने के लिए विभिन्न बैंक 31 दिसंबर 2009 तक एक दूसरे को रिण की गारंटी देंगे.

वर्तमान वित्तीय संकट में यह तथ्य एक बड़ी परेशानी बनकर उभरा था कि बैंकों का एक दूसरे पर से भरोसा उठ गया था और वो एक दूसरे को कर्ज़ देने में हिचक रहे थे.

सोमवार को बाज़ार खुलने से पहले दुनिया भर के नेता इस कोशिश में जुटे हुए हैं कि किसी तरह बाज़ारों को और गिरने से रोका जाए. यूरोपीय संघ के वर्तमान प्रमुख फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने यूरोप के 15 नेताओं के साथ घंटों की बातचीत के बाद इस योजना के बारे में जानकारी दी.

ब्रिटेन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने इस बैठक की कुछ वार्ताओं में हिस्सा लिया है. सारकोज़ी का कहना था कि विभिन्न नेता मिलकर एक ऐसे प्लान की रुपरेखा पर सहमत हुए हैं जिसके तहत विभिन्न देश अपने अपने देशों के बाज़ार में पैसा डाल सकेंगे.

उन्होंने बताया कि जर्मनी इटली और फ्रांस सोमवार को अपनी अपनी योजनाएं पेश करेंगे. उनका कहना था, ' पिछले कुछ दिनों में वित्तीय संकट ने ऐसा रुप ले लिया है कि इससे अकेले या अलग अलग मुकाबला करना संभव नहीं है.'

राष्ट्रपति का कहना था कि इस योजना में वित्तीय संकट के सभी पहलूओं का ध्यान रखा गया है लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इस योजना में कितना धन खर्च किया जाएगा.

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