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बुरहानपुर में सांप्रदायिक हिंसा से तनाव

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बुरहानपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है लेकिन दोनों समुदायों के बीच तनाव है
मध्य प्रदेश के शहर बुरहानपुर में शुक्रवार रात के बाद से सांप्रदायिक दंगे की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है लेकिन स्थिति तनावपूर्ण है. रविवार की रात ही शहर से बाहर एक गाँव में कुछ लोगों ने आगजनी के प्रयास किए लेकिन पुलिस बल के वहां पहुँच जाने के कारण मामला काबू में आ गया.

अब तक इस दंगे में मारे गए लोगों की संख्या पुलिस के अनुसार नौ हो गई है जबकि 27 घायल हैं. शुक्रवार सुबह से लगा कर्फ्यु आज भी जारी रहा, सिवाए सुबह के एक घंटे के जब प्रशासन ने महिलाओं के लिए इसमें एक घंटे की ढील दी.

रविवार सुबह पुलिस को कपड़े की एक मिल से एक व्यक्ति की जली हुई लाश मिली जिसे पुलिस लालबाग़ एरिया में शुक्रवार रात हुई आगजनी का हिस्सा बता रही है.

लाल बाग़, जहाँ के अलग अलग क्षेत्रों में मुस्लिम और हिंदू मुहल्लों के अलावा मिली-जुली आबादी के इलाके भी हैं शुक्रवार रात कर्फ्यु के बावजूद बलवाईयों ने तीस से अधिक घरों को आग लगा दी.

इस लाश के मिलने के बाद से प्राशासन के अनुसार इस हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक दंगों में मारे जाने वालों की कुल तादाद नौ हो गई है, जिसमें तीन लोग पुलिस की गोली का शिकार हुए जबकि छह अन्य धारदार हथियारों से आई चोटों या फिर आगजनी का शिकार हुए हैं.

मारे गए लोगों में से दो हिंदू हैं जबकि एक महिला समेत सात मुसलमान थे. रविवार को ही प्रशासन ने नगर के धार्मिक, सामाजिक, राजनितिक एवं अन्य लोगों की मिली जुली शान्ति समिति गठित की लेकिन बैठक के भीतर खटास का माहौल जारी रहा.

इसी बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनशक्ति नेता उमा भरती ने इस दंगे के लिए कांग्रेस और राज्य में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार तहराया है; साथ ही यह भी मांग की है की बुरहानपुर के सांसद नन्द किशोर चौहान और राष्ट्र वादी कांग्रेस पार्टी नेता हामिद काजी के ख़िलाफ़ कानूनी करवाई की जाए.

उन्होनें भोपाल में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा की अगर सरकार ऐसा नही करती तो वह आमरण अनशन करेंगीं. इस दंगे में मारे गए दो लोग उमा भारती की पार्टी के थे जिनके परिवार वालों ने हामिद काजी और अन्य के खिलाफ हत्या का मामला पुलिस में दर्ज करवाया है.

हामिद काजी ने इन आरोपों से इनकार किया है. बीजेएस के राज्य अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने बुरहानपुर आकर इन मृतकों के परिवार वालों से मुलाक़ात करने की कोशिश भी की थी लेकिन प्रशासन ने उन्हें हिरासत में लेकर शहर से बाहर भेज दिया.

प्रशासन ने कांग्रेस द्वारा दंगों की जाँच के लिए तैयार एक तीन सदस्य समिति को भी शहर में आने से रोक दिया. समिति अद्यक्ष असलम शेर खान ने बाद में कहा की बी जे पी को दंगे शुरू करवाने की कीमत चुकानी होगी.

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