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निशाने पर है भारत की गंगा-जमुनी तहजीब : प्रधानमंत्री (लीड-2)

By Staff
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    नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल के दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में फैली हिंसा की घटनाओं को दुखद बताते हुए कहा कि आज सबसे अधिक परेशानी पैदा करने वाली और खतरनाक बात भारत की गंगा जमुनी तहजीब पर हमला है। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व से देश के बहुलवादी ढांचे का संरक्षण करने की अपील की है।

    राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "सांप्रदायिक सद्भाव, एकता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को नुकसान पहुंचाने वालों को कड़ी सजा दिए जाने की जरूरत है। हम समस्या के हल की खोज में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को उलटने या रोकने को प्रोत्साहित नहीं करेंगे।"

    मनमोहन सिंह ने कहा कि अभी हाल ही में हम उत्तर-पूर्व, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, उड़ीसा और असम में विखंडनवादी प्रवृत्ति के बढ़ने के गवाह हैं।

    उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाइयों पर हुए हमले और असम तथा महाराष्ट्र में पिछले महीने हुई सांप्रदायिक हिंसा का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशी ताकतों की रुचि के कारण स्थिति और बिगड़ी है जो भारत की एकता को नष्ट करना चाहती हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सभ्यता का प्रमुख लक्षण विविधता में एकता है। हमने कभी भी एकरूपता थोपने या विविधता को कम करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने उल्लेख किया कि नस्लीय और धार्मिक समुदाय सदियों से एक दूसरे के साथ शांतिपूर्वक रहते आए हैं।

    उन्होंने कहा कि आज समुदायों के बीच गलत विभाजन रेखा विकसित हो रही है। उड़ीसा, कर्नाटक, और असम की घटनाओं से हर सही सोच वाले व्यक्ति को तकलीफ हुई है, जहां हिंदू, ईसाई, मुस्लिम और आदिवासी समुदायों के बीच संघर्ष हुए हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि घृणा और हिंसा का माहौल कृत्रिम रूप से पैदा किया जा रहा है। कुछ ताकतें जानबूझ कर ऐसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रही हैं और तर्कहीन हिंसा में लिप्त आतंकवादी समूह भी इसमें योगदान दे रहे हैं।

    मनमोहन सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक आधारशिलाओं को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकारों को समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास करने वाले और उनको संरक्षण देने वालों के प्रयासों को विफल करना होगा।

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने कर्नाटक में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा पर केंद्र सरकार द्वारा की गई टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कर्नाटक के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है, जबकि अन्य तमाम राज्यों में भी सांप्रदायिक तनाव की स्थितियां बनी हुई हैं।

    उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, असम, त्रिपुरा, दिल्ली व आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में गंभीर सांप्रदायिक व आतंकी गतिविधियां जारी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इन राज्यों को इस तरह का कोई दिशा निर्देश नहीं जारी किया।

    येदियुरप्पा ने कहा कि जब पहले ही मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए जा चुके थे तो ऐसे में किसी केंद्रीय टीम का राज्य का दौरा करने का कोई औचित्य नहीं बनता था। इतना ही नहीं टीम ने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपने के पहले प्रेस में बयान भी जारी किए जो कि कतई उचित नहीं था।

    उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि कंधमाल जिले में हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने या नहीं लगाने का निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।

    पटनायक ने संवाददाताओं से कहा,"मैं समझता हूं बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार में विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो चुकी है। इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार को है।"

    पटनायक ने कहा, "राज्य सरकार के प्रयास अब रंग लाने लगे हैं और हम मरहम लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने कंधमाल में हिंसा भड़काने के आरोप में बजरंग दल के सदस्यों सहित एक हजार से भी अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।"

    एनआईसी की बैठक के एजेंडे में आतंकवाद को शामिल नहीं किए जाने पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति में शामिल है।

    एनआईसी की बैठक में शामिल होने के बाद मोदी ने संवाददाताओं से कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आतंकवाद का मुद्दा एनआईसी की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं है। यह केवल वोट बैंक की राजनीति है।"

    उन्होंने कहा कि आतंकवाद देश का सबसे ज्वलंत मुद्दा बन गया है, इस मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की गंभीरता का अभाव साफ दिखाई देता है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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