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वित्तीय संकट : आशंकाओं के बीच स्थिति में सुधार के आसार (राउंडअप)

By Staff
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    नई दिल्ली/फ्रैंकफर्ट/बीजिंग, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। पिछले हफ्ते दुनिया के तमाम विकसित व विकासशील देशों की ओर से किए गए प्रयासों का सोमवार को स्पष्ट असर देखा गया। एशिया-प्रशांत और यूरोप के तमाम शेयर बाजारों में जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई।

    वित्तीय संकट के और गहराने की आशंक के मद्देनजर इससे उत्पन्न अनिश्चितता के दौर को थामने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने देश की जनता को सोमवार को भरोसा दिलाया कि अर्थव्यवस्था का विकास संतोषजनक ढंग से हो रहा है।

    चिदंबरम ने नई दिल्ली में सोमवार को कहा, "अनिश्चितता की स्थिति होने के बावजूद कुछ तथ्यों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। शेयर बाजारों के सूचकांक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे इकलौते संकेतक नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि प्रमुख समस्या तरलता की कमी की थी। उससे निपटने के उपाय किए जाएंगे।

    इस बयान के बाद बंबई स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक 'सेंसेक्स' आज सुबह 559.83 अंकों की शानदार बढ़त के साथ 10,817.68 पर खुला और कारोबार की समाप्ति पर शुक्रवार बंद के मुकाबले 808.81 अंक यानी 7.68 प्रतिशत जबरदस्त बढ़त दर्शाते हुए 11,336.66 पर बंद हुआ। हालांकि यह 11,361.32 के उच्चतम स्तर तक गया था।

    नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक 'निफ्टी' भी आज शुक्रवार बंद के मुकाबले 210.75 अंक यानी 6.43 प्रतिशत जबरदस्त बढ़त के साथ 3,490.70 पर बंद हुआ। आज सुबह यह 7.05 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 3,272.90 पर खु़ला और 3,510.20 के उच्चतम स्तर तक गया।

    इसके बाद यूरोप के शेयर बाजारों ने भी शानदार वापसी की। शुक्रवार को इनमें जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई थी।

    पिछले सप्ताह यूरोपीय शेयर बाजारों में लगभग 20 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट आई थी। इसे वर्ष 1930 के बाद अब तक का सबसे गंभीर आर्थिक संकट बताया गया था। लेकिन सोमवार सुबह शुरुआती कारोबार के दौरान यूरोप के ब्लू चिप कंपनियों के सूचकांक 'स्टॉक्स 50' 6.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,230 के स्तर पर आ गया।

    इस दौरान लंदन स्थित यूरोप के प्रीमियर शेयर बाजार में लगभग पांच प्रतिशत, पेरिस, मिलान एवं मैड्रिड के शेयर बाजारों में छह प्रतिशत से ज्यादा और फ्रैंकफर्ट के शेयर बाजार में 5.7 प्रतिशत का उछाल आया।

    चीन ने हालांकि चिंता जताई। 'चाइना डेवेलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन' के महासचिव तांग मिन ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में जोरदार हिस्सेदारी की वजह से चीन के लिए मौजूदा वित्तीय उथल-पुथल के प्रभाव से पूरी तरह बचे रहना असंभव है, इसलिए आर्थिक मंदी अपरिहार्य है।"

    उन्होंने हालांकि कहा कि वित्तीय संकट की वजह से समय पर यह पता चल गया कि कारोबार के मामले में चीन की तरक्की स्थाई नहीं है। बाहरी मांगों के कारण इसमें जरूरत से ज्यादा उछाल आया था। मांग घटने की वजह से अब मंदी भी आएगी, इसलिए बेहतर भविष्य के लिए हमें अपनी नीतियां बदलनी पड़ेगी।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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