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अफ़ीम संयंत्रों पर हमले करेगा नैटो

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अमरीका का कहना है कि अफ़ीम के व्यापार से विद्रोहियों को आर्थिक मदद मिलती है
नैटो इस बात के लिए पहली बार सहमत हुआ है कि वह अपने सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान के अफ़ीम संयंत्रों पर हमले करने की अनुमति देगा. नैटो के प्रवक्ता जेम्स अपाथुराइ ने कहा है कि नैटो के सैनिक अफ़ग़ान सेना के साथ काम करेंगे.

उनका कहना था कि नशीली दवाओं के ज़रिए तालेबान को आर्थिक मदद उपलब्ध करवाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी. बुडापेस्ट में नैटो के रक्षामंत्रियों की बैठक में इसका फ़ैसला किया गया.

अफ़ग़ान सैनिक अब तक नशीली दवा उद्योग के ख़िलाफ़ लड़ते रहे हैं और अब अमरीका चाहता है कि अफ़ीम के व्यापार के ख़िलाफ़ और आक्रामक लड़ाई लड़ी जाए.

नैटो के इस फ़ैसले का अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने स्वागत किया है.

असर

नैटो और अमरीकी सेना मिलकर अब तक अफ़ीम की खेती के ख़िलाफ़ तो कार्रवाई करते रहे हैं लेकिन अभी तक वे अफ़ीम के संयंत्रों और इसके वितरण पर कार्रवाई नहीं की जाती रही है.

काबुल में बीबीसी के संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि नशीली दवाओं के ख़िलाफ़ अब तक अफ़गान सेना और पुलिस तो कार्रवाई करती रही लेकिन उसका असर न के बराबर ही हुआ है.

उनका कहना है कि लेकिन अब अगर नैटो के सैनिक इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगें तो सुरक्षा व्यवस्था पर इसका असर दिखाई दे सकता है. उल्लेखनीय है कि दुनिया के अवैध अफ़ीम का 90 प्रतिशत हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान से आता है. अफ़ीम का उपयोग हेरोइन बनाने के लिए किया जाता है.

अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम के उत्पादन और इसके व्यापार को लेकर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता जताता रहा है.

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