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मुद्राकोष ने शुरु की नई वित्तीय प्रक्रिया

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मुद्राकोष प्रमुख ने कहा है कि अकेले कोई देश इस संकट से नहीं निपट सकता
आर्थिक संकट की मार झेल रहे दुनिया भर के देशों की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने एक आपात वित्तीय प्रक्रिया की शुरुआत की है. आईएमएफ़ के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस-काहन ने कहा है कि वित्तीय सहायता मुहैया करवाने की इस नई प्रक्रिया से आईएमएफ़ देशों को जल्दी से सहायता उपलब्ध करवा पाएगा.

1997 में जब एशियाई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे तो आईएमएफ़ ने ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई थी. ज़ाहिर है कि इसके चलते वह कर्ज़ देने की प्रक्रिया को तेज़ कर सकेगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की बैठक से पहले स्ट्रॉस-ख़ान ने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए देशों को 'तेज़ी से, पूरी ताक़त से और एक दूसरे का सहयोग करते हुए' क़दम उठाने चाहिए.

सहयोग की ज़रुरत

इस संकट से निपटने के लिए दुनिया भर के सात केंद्रीय बैंकों ने मिलकर ब्याज़ दर घटाने की घोषणा की है और इसके एक दिन बाद आईएमएफ़ के प्रमुख ने कहा है कि सब को मिलकर और क़दम उठाने की ज़रुरत है.

इस तरह की समस्या का कोई घरेलू हल नहीं होता
उन्होंने कहा, "नीति के स्तर पर सभी को मिलकर फ़ैसले लेने होंगे."कई यूरोपीय देशों ने जो क़दम उठाए हैं उनका ज़िक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस संकट से निपटने के लिए अकेले उठाए जाने वाले क़दम कारगर साबित नहीं होंगे.

उनका कहना था, "इस तरह की समस्या का कोई घरेलू हल नहीं होता." स्ट्रॉस-काहन ने कहा कि पिछले कुछ हफ़्तों में जो कुछ हुआ है उसका असर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं पर होने लगा है क्योंकि कर्ज़ की सीमा घट गई है और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में मांग घटने से व्यवसाय पर असर पड़ने लगा है.

आईएमएफ़ प्रमुख ने कहा कि आपात वित्तीय व्यवस्था के ज़रिए संस्था ऐसे किसी भी देश को कर्ज़ मुहैया करवाने के लिए तैयार है जिसे इसकी ज़रुरत है.इस प्रक्रिया की शुरुआत 1995 में मैक्सिको की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए की गई थी.

1997 में एशियाई संकट शुरु होने के बाद फ़िलिपीन्स, थाईलैंड, कोरिया और इंडोनेशिया ने भी इसी प्रक्रिया के ज़रिए अरबों डॉलर का कर्ज़ लिया था. इसके अलावा विश्वबैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोएलिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि 'आर्थिक संकट को मानवीय त्रासदी में परिवर्तित होने से' बचाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई ब्याज़ दरों और घटते निर्यात के चलते ग़रीब अर्थव्यवस्थाओं को चोट पहुँचाएगी और कई मामलों में इसका असर उन देशों पर भी पड़ेगा जहाँ बैंक दिवालिया हो रहे हैं.

बाज़ार का गिरना जारी

दुनिया के सात प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज़ दर घटाने और पूंजी बाज़ार में बड़े निवेश के बाद भी यूरोप और अमरीका में शेयर बाज़ारों में गिरावट का दौर जारी है.
न्यूयॉर्क में डाउ जोन्स में सूचकांक अपने पाँच साल के न्यूनतम स्तर तक पहुँच गया.

लंदन, फ़्रैंकफ़र्ट और पेरिस में शेयर बाज़ार शुरुआती बढ़त के बाद आख़िर में गिरावट के साथ ही बंद हुए.एफ़टीएसई-100 में 1.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि फ़्रांसीसी शेयर बाज़ार 1.55 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ.

जानकारों का कहना है कि निवेशक अब भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मौजूदा आर्थिक संकट मंदी की ओर बढ़ रहा है.जापान का निकेई गिरावट के साथ बंद हुआ है. जापान के प्रधानमंत्री ने अपील की है कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए और क़दम उठाने की आवश्यकता है.

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