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'अब गुजरात से निकलेगी नैनो'

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रतन टाटा ने सिंगुर से हटते समय पश्चिम बंगाल में विपक्ष को इसके लिए दोषी ठहराया
टाटा समूह की बहुचर्चित नैनो कार का उत्पादन अब गुजरात में होगा. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और टाटा समूह मंगलवार शाम इसकी घोषणा करेंगे. अहमदाबाद में मौजूद स्थानीय पत्रकार महेश लांगा के अनुसार गुजरात के मुख्य सचिव डी राजगोपालन ने इस बात की पुष्टि की है कि नैनो का उत्पादन अब गुजरात में होगा.

गुजरात के मुख्य सचिव राजगोपालन का कहना था, "अब ये निर्णय ले लिया गया है कि नैनो कार का उत्पादन गुजरात से होगा. राज्य में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और टाटा समूह के रतन टाटा इस बारे में मंगलवार की शाम को मीडिया को संबोधित करेंगे."

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुजरात सरकार ने अहमदाबाद से लगभग 30 किलोमीटर दूर आनंद कृषि विश्वविद्यालय की एक हज़ार एकड़ ज़मीन टाटा समूह को इस कारखाने के लिए उपलब्ध कराने की पेशकश की है.

अब ये निर्णय ले लिया गया है कि नैनो कार का उत्पादन गुजरात से होगा. राज्य में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और टाटा समूह के रतन टाटा इस बारे में मंगलवार की शाम को मीडिया को संबोधित करेंगे
अधिकारियों के अनुसार इस बारे में चर्चा अब अंतिम चरण में है.

रतन टाटा की घोषणा

हाल ही में टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने घोषणा की थी कि पश्चिम बंगाल के सिंगुर में नैनो कारखाने के लगातार विरोध के कारण टाटा समूह ने फ़ैसला किया है कि नैनो का उत्पादन पश्चिम बंगाल में नहीं होगा.

उस समय उन्होंने ये भी कहा था कि राज्य सरकार की तरफ़ से तो उन्हें ख़ासा सहयोग मिला है कि लेकिन पश्चिम बंगाल में त्रिणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्ष के विरोध और प्रदर्शनों के कारण उन्हें ये कदम उठाना दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनोपड़ा है.

रतन टाटा ने उस समय मीडिया को बताया था, "दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो उत्पादन के लिए हमें तीन-चार राज्यों ने आमंत्रित किया है और हम जल्द ही फ़ैसला करेंगे कि उत्पादन कहाँ होगा."

हमें फैक्ट्री लगाने में बहुत आक्रामक विरोध का सामना करना पड़ा, हमें लगा कि विपक्ष जायज बात को समझेगा और हमें पर्याप्त भूमि मिल सकेगी ताकि मुख्य प्लांट और सहायक इकाइयाँ एक साथ लगाई जा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हम हमेशा पुलिस की सुरक्षा में काम नहीं करना चाहते थे
महत्वपूर्ण है कि इस साल अगस्त महीने की शुरुआत से ही ममता बनर्जी की पार्टी के कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने नैनो कारखाने का विरोध शुरु कर दिया था और इससे टाटा समूह ख़ासा नाराज़ और परेशान था.

दस हज़ार से अधिक किसान मुआवज़ा लेकर अपनी ज़मीन देने को तैयार थे लेकिन दो हज़ार किसान किसी हालत में अपनी ज़मीन नहीं छोड़ना चाहते थे.

रतन टाटा ने कहा था, "हमें फैक्ट्री लगाने में बहुत आक्रामक विरोध का सामना करना पड़ा, हमें लगा कि विपक्ष जायज बात को समझेगी और हमें पर्याप्त भूमि मिल सकेगी ताकि मुख्य प्लांट और सहायक इकाइयाँ एक साथ लगाई जा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हम हमेशा पुलिस की सुरक्षा में काम नहीं करना चाहते थे."

उस समय पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने कहा था, "यह राज्य के लिए एक काला दिन है, अब नए निवेश आकर्षित करना बहुत मुश्किल होगा."

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