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माओवादियों ने की लक्ष्मणानंद की हत्या

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Swami Laxmananand
भुवनेश्वर, 6 अक्टूबरः उड़ीसा के कंधमाल जिले में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और चार अन्य की हत्या की जिम्मेदारी माओवादियों के एक संगठन द्वारा लेने के दावे से इस प्रकरण में नया मोड़ आ गया है।

राज्य के कंधमाल जिले के जलासपेटा आश्रम में गत 23 अगस्त को सरस्वती की हत्या के बाद हुई साम्प्रदायिक हिंसा में अब तक 35 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस घटना के बाद मकानों एवं प्रार्थनास्थलों को जलाने के कारण हजारों लोग बेघर हो गये हैं।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेता सब्यसाची पांडा ने अज्ञात स्थान से कुछ निजी टीवी चैनलों को साक्षात्कार में दावा किया कि उनके समूह ने सरस्वती और उनके चार शिष्यों की हत्या की थी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जिले में हिंसा के लिये जिम्मेदार कुछ और लोगों की भी हत्या की जा सकती है।

पांडा ने कहा कि सरस्वती के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये वहां की जनता का दबाव था। उन्होंने कहा कि दिसम्बर 2007 में जिले में हुई हिंसा के बाद माओवादियों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी। माओवादी नेता ने कहा कि हत्या के बाद उन्होंने घटनास्थल पर जिम्मेदारी संबंधी दो पत्र छोड़े थे लेकिन उन पत्रों को पुलिस ने छिपा कर रख लिया।

इसके बाद माओवादियों ने सरस्वती की हत्या की जिम्मेदारी वाले पत्र मीडिया को डाक से भेजे थे, लेकिन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल और महासचिव प्रवीण तोगड़िया ने वास्तविकता को नजरअंदाज कर इसका आरोप कुछ ईसाई उग्रवादियों पर आरोप लगा दिया।

उड़ीसा सरकार ने हत्या की जांच के लिये पुलिस महानिरीक्षक अपराध शाखा की अध्यक्षता में विशेष दल का गठन किया। टीम ने दो संदिग्धों के रेखाचित्र भी जारी किये लेकिन अभी तक उन्हें गिरफ्तार नही कर पाई।

इस संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक एम एम प्रहराज ने कहा कि माओवादी के दावे के बाद अपराध शाखा जांच में इसे भी शामिल करेगी।

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