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यूरोपीय देश वित्तीय संकट से निबटेंगे

By Staff
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वित्तीय संकट को लेकर यूरोपीय देशों के नेता भी चिंतित हैं
प्रमुख यूरोपीय देश संकट से घिरे वित्तीय संस्थानों की मदद करने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि इसके लिए किसी पैकेज की घोषणा नहीं की गई है.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सर्कोज़ी की पहल पर पेरिस में हुई आपात बैठक में अमरीका की तरह किसी वित्तीय पैकेज की घोषणा नहीं की गई.

लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा,'' हर सरकार अपने तरीके और संसाधनों से लेकिन समन्वित तरीके से काम करेगी.''

ब्रितानी प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था में धन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल का कहना था कि हर देश को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए.

हर सरकार अपने तरीके और संसाधनों से लेकिन समन्वित तरीके से काम करेगी

उन्होंने स्पष्ट किया कि वो आयरलैंड के बैंक जमा की गारंटी देने के क़दम से खुश नहीं हैं.

इन यूरोपीय नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है जिसमें जल्द से जल्द जी-8 सम्मेलन बुलाने की बात कही गई है ताकि वित्तीय बाज़ार को लेकर ज़रूरी क़दमों की समीक्षा की जा सके.

अमरीकी प्रयास

ग़ौरतलब है कि हाल ही में अमरीकी संसद ने वित्तीय संकट से उबरने के लिए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के 700 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज वाले विधेयक को मंज़ूरी दे दी थी.

अब अमरीका सरकार डूब चुके वित्तीय संस्थानों के कर्ज़ों का भार सरकार ख़ुद ले सकेगी.

हालांकि अमरीकी जनता इस पैकेज को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है.

आम धारणा यह है कि ये पैकेज जनता के लिए नहीं बल्कि वॉल स्ट्रीट और बड़े-बड़े बैंकरों को बचाने के लिए है.

सबसे बड़ी बात ये है कि इस पैकेज की पैरवी करने वाले खुद इस बात की गारंटी लेने को तैयार नहीं है कि इस पैकेज से वित्तीय संकट टल ही जाएगा.

कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ये संकट बहुत बड़ा है और 700 अरब डॉलर का पैकेज ऊँट के मुँह में जीरा जैसा है.

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