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राइस-प्रवण की दिल्ली में बातचीत

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कोंडोलीज़ा राइस का कहना है कि परमाणु क़रार में कुछ प्रशासनिक औपचारिकताएं बाकी हैं
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस एक दिन की यात्रा पर भारत में हैं. शनिवार को उनकी भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुकर्जी से बातचीत हुई है.

कोंडोलीज़ा राइस ने भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ बैठक की है. दोनों के बीच असैन्य परमाणु समझौते के बाद उठाए जाने वाले क़दमों और अन्य मसलों पर चर्चा हुई.

राइस बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाक़ात करेंगी. इससे पूर्व, दोनों पक्षों ने 123 समझौते पर हस्ताक्षर के लिए शनिवार दोपहर दो बजे का समय मुक़र्रर किया था, लेकिन समाचार एजेंसियों के अनुसार कुछ औपचारिकताओं के पूरा न होने के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका.

दरअसल, 123 समझौते को अमरीकी सेनेट से मंज़ूरी मिल तो गई है, लेकिन अभी इस पर राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के हस्ताक्षर होने बाकी हैं.

असमंजस

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत चाहता है कि राष्ट्रपति बुश पहले इस विधेयक पर हस्ताक्षर करें. भारत चाहता है कि कुछ मुद्दों - ख़ासकर ईंधन आपूर्ति की सुनिश्चितता को लेकर भारत में अब भी कुछ कयास लगाए जा रहे हैं, इसलिए बुश को इस बारे में भी स्पष्ट बयान देना चाहिए.

हालाँकि अमरीका कोंडोलीज़ा राइस की इसी यात्रा के दौरान 123 समझौते पर हस्ताक्षर के लिए उत्सुक था. राइस ने भारत आने से पहले कहा भी था कि ज़रूरी नहीं कि राष्ट्रपति बुश के हस्ताक्षर के बाद ही दोनों देश 123 समझौते पर दस्तखत करें. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति बुश बाद में भी समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं.

प्रशासनिक मसलों को आखिरी समय में निपटाए जाने के सवाल पर राइस ने कहा था कि इन्हें अंत में ही निपटाया जाना था, क्योंकि काफ़ी अधिक प्रशासनिक मामले हैं जिन्हें निपटाया जाना है.

राइस ने कहा, "बुश प्रशासन परमाणु क़रार के प्रशासनिक ब्यौरे को अध्ययन कर रहा है. लेकिन इस ऐतिहासिक समझौते के बाद हमें अब ये देखना चाहिए कि द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है."

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