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राष्ट्रपति बुश का आर्थिक पैकेज मंज़ूर

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ज़्यादातर रिपब्लिकन सदस्यों ने पैकेज का विरोध किया
अमरीकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने वित्तीय संकट से उबरने के लिए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के 700 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज को मंज़ूरी दे दी है.
इस विधेयक को 171 के मुक़ाबले 263 वोटों से मंज़ूरी मिली है. इससे वॉल स्ट्रीट में असफल हो चुके वित्तीय संस्थानों के उन कर्जों को माफ़ किया जाएगा जो डूब चुके हैं.

इस विधेयक के पारित होने के बाद राष्ट्रपति बुश ने सांसदों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने 'सहयोग की भावना' दिखाई है. व्हाइट हाउस में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में बुश ने कहा, ' हमने साथ आकर साहस का काम किया है ताकि वॉल स्ट्रीट का संकट पूरे देश का संकट न बन जाए. '

उन्होंने माना कि कई सांसदों में सरकार की भूमिका और योजना की लागत को लेकर शंकाएं हैं लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि उन्होंने तभी हस्तक्षेप किया है जब यह बिल्कुल ज़रुरी था. उन्होंने कहा, ' इस स्थिति में कार्रवाई करनी अत्यंत ज़रुरी थी. ' हालांकि राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इस पैकेज का बाज़ार पर असर पड़ने में समय लग सकता है.

अमरीका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन और फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन बेन बर्नानके ने भी कांग्रेस की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस विधेयक से वित्तीय बाज़ारों को स्थायित्व मिल सकेगा.

बीबीसी के आर्थिक संवाददाता ग्रेग वुड का कहना है कि विधेयक पारित होना पहला कदम है और इसका असर देखने में कई महीने लग सकते हैं और तभी पता चल सकेगा कि इस पैकेज से कितना फ़ायदा हुआ है.

विरोध

पिछले दिनों राष्ट्रपति बुश को उस समय तगड़ा झटका लगा था जब प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को नामंज़ूर कर दिया था. लेकिन उसके बाद इस विधेयक में कई बदलाव किए गए और उन्हें फिर से सदन में पेश किया गया. इन बदलावों में टैक्स में कटौती की बात भी थी. इसके बाद पहले सीनेट ने इस विधेयक को मंज़ूर किया और शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा ने भी इसे हरी झंडी दे दी.

राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी के कई सदस्य इस पैकेज के ख़िलाफ़ थे. इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि ज़्यादातर रिपब्लिकन सदस्यों ने विधेयक के ख़िलाफ़ मत दिया.

पहली बार बुश का पैकेज नामंज़ूर हो गया था .रिपब्लिकन पार्टी के 91 सदस्यों ने इसके पक्ष में और विरोध में 108 सदस्यों ने मत डाले.इससे यही अंदाज़ा होता है कि रिपब्लिकन पार्टी सदस्यों में अभी भी घबराहट है. दरअसल अमरीकी जनता इस पैकेज को लेकर बहुत उत्साहित नहीं.

आम धारणा ये है कि ये पैकेज जनता के लिए नहीं बल्कि वॉल स्ट्रीट और बड़े-बड़े बैंकरों को बचाने के लिए है. सबसे बड़ी बात ये है कि इस पैकेज की पैरवी करने वाले इसकी गारंटी लेने को तैयार नहीं है कि इस पैकेज से वित्तीय संकट टल ही जाएगा.

राष्ट्रीय बुश के इस पैकेज का मुख्य मक़सद बैंकों के ऐसे क़र्ज़ों के लिए पैसा लगाना है जो डूब गए हैं या जिनके लौटाए जाने की कोई उम्मीद नहीं है.हालाँकि कई अर्थशास्त्रियों का ये कहना है कि ये संकट बहुत बड़ा है और 700 अरब डॉलर का पैकेज ऊँट के मुँह में जीरा जैसा है.

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