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भारत-अमेरिका 123 समझौते पर जल्द करेंगे दस्तखत (राउंडअप)

By Staff
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नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका ने शनिवार को कहा है कि दोनों देश जल्द ही असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर नाखुशी जाहिर की कि कोंडोलीजा राइस के दिल्ली में रहने के बावजूद 123 समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो सके।

अमेरिकी विदेशमंत्री कोंडोलीजा राइस के साथ नई दिल्ली में बैठक के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि परमाणु करार आखिरी चरण में है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका जल्द ही 123 समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

मुखर्जी ने कहा कि परमाणु करार से भारत के लिए वैश्विक परमाणु बाजार का रास्ता खुल जाएगा।

मुखर्जी ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तब हम समझौते पर जल्द ही हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे।"

राइस ने कहा कि बुश प्रशासन परमाणु करार के प्रशासनिक ब्यौरे का अध्ययन कर रहा है लेकिन इस ऐतिहासिक समझौते के बाद हमें यह देखना चाहिए कि द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।

आईएएनएस संवाददाता द्वारा पूछे एक सवाल पर राइस ने कहा, "123 समझौते में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जो छुपा हुआ है।"

सूत्रों के अनुसार भारत चाहता है कि बुश पहले विधेयक पर हस्ताक्षर करें और उसे कानून में बदलें क्योंकि वह कुछ खास पहलुओं पर, विशेष रूप से परमाणु ईंधन की आपूर्ति के आश्वासन को लेकर बुश का बयान चाहता है।

राइस और मुखर्जी ने परमाणु करार के अलावा आतंकवाद, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और पाकिस्तान और अफगानिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर भी बातचीत की।

उधर अमेरिकी विदेशमंत्री कोंडोलिजा राइस के भारत दौरे में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बारे में जारी संशय के बीच अमेरिका ने भारत के साथ परमाणु व्यापार आरंभ करने से पहले आवश्यक चार कदमों की रूपरेखा तैयार की है।

123 समझौते को कांग्रेस से मंजूरी के बाद उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारत के साथ परमाणु व्यापार शुरू करने से पहले कुछ प्रक्रियात्मक कार्य पूरे किए जाने आवश्यक हैं।

1. भारत और अमेरिका 'अमेरिका-भारत परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी सहयोग समझौते' (123 समझौता) पर हस्ताक्षर करें। इसका मसौदा जुलाई 2007 से ही तैयार है।

2. अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश कांग्रेस से पारित 123 समझौते से संबंधित विधेयक पर अवश्य हस्ताक्षर करें।

3. इस विधेयक के कानून बनने के बाद उसके अनुसार राष्ट्रपति को दो प्रमाणपत्र देने होंगे।

(1) समझौते के निष्कर्ष और क्रियान्वयन परमाणु अप्रसार संधि के तहत अमेरिकी दायित्वों के अनुरूप हैं।

(2) अमेरिका की नीति परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह के सदस्यों के साथ काम करने की है जो अन्य किसी को यूरेनियम संवर्धन और पुन:परिष्करण की तकनीक और उपकरणों के साथ परमाणु ईंधन देने को प्रतिबंधित करती है।

4. इस प्रमाणपत्र के बाद भारत और अमेरिका 123 समझौते के अनुच्छेद 16(1) के मुताबिक कूटनीतिक नोट्स का आदान-प्रदान करेंगे। इस तरह से 123 समझौता लागू हो जाएगा।

इससे पहले शुक्रवार को भारत रवाना होने से पूर्व वाशिंगटन में कोंडोलीजा राइस

कहा था कि हम समझौते की शर्तो को देख रहे हैं और काफी अधिक प्रशासनिक विवरण अभी निपटाने बाकी हैं।

राइस ने कहा था कि समझौता अभी केवल दो दिन पहले कांग्रेस से पारित हुआ है और राष्ट्रपति जार्ज बुश विधेयक पर हस्ताक्षर करने पर विचार कर रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके द्वारा 123 समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले राष्ट्रपति को संसद में पारित विधेयक पर हस्ताक्षर करने होंगे, राइस ने कहा कि राष्ट्रपति उनके हस्ताक्षर करने से पहले दस्तखत नहीं करने होंगे।

यह पूछे जाने पर कि प्रशासनिक मुद्दों को आखिरी समय में क्यों निपटाया जा रहा है? राइस ने कहा कि इन्हें अंतिम समय में ही निपटाया जाना था। क्योंकि काफी अधिक प्रशासनिक मामले हैं, जिनको हमें निपटाना है।

प्रशासनिक मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए कहे जाने पर राइस बताया कि हमें विधेयक को अभी नामांकित करना है।

राइस कहा था कि उनके भारत दौरे में भारत-अमेरिका संबंधों के अगले कदम के बारे में वार्ता होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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