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टाटा ने संयंत्र हटाने का फ़ैसला किया

By सुबीर भौमिक
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रतन टाटा ने विपक्ष को दोषी ठहराया है
टाटा समूह ने पश्चिम बंगाल में सिंगुर से अपने नैनो उत्पादन संयंत्र को हटाने का फ़ैसला कर लिया है. संयंत्र को कहाँ ले जाएगा यह नहीं बताया गया है.

टाटा समूह सिंगुर स्थित अपने संयंत्र को पश्चिम बंगाल से हटा रहा है लेकिन यह नहीं बताया गया है कि नैनो का उत्पादन अब कहाँ होगा.

रतन टाटा ने कहा, "हमें कई भारतीय राज्यों ने आमंत्रित किया है कि हम उनके यहाँ नैनो के उत्पादन के लिए संयंत्र लगाएँ लेकिन अभी तक हमने निर्णय नहीं किया है."

उन्होंने पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार की कोशिशों की सराहना की और कहा कि विपक्ष की नीतियों की वजह से उन्हें यह फ़ैसला करने पर मजबूर होना पड़ा.

पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने इस घोषणा के बाद कहा, "यह राज्य के लिए एक काला दिन है, अब नए निवेश आकर्षित करना बहुत मुश्किल होगा."

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ कोलकाता में एक नाकाम मुलाक़ात के बाद उन्होंने पत्रकारों को अपने निर्णय की जानकारी दी.

हमें फैक्ट्री लगाने में बहुत आक्रामक विरोध का सामना करना पड़ा, हमें लगा कि विपक्ष जायज बात को समझेगी और हमें पर्याप्त भूमि मिल सकेगी ताकि मुख्य प्लांट और सहायक इकाइयाँ एक साथ लगाई जा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हम हमेशा पुलिस की सुरक्षा में काम नहीं करना चाहते थे
रतन टाटा ने कहा, "हमें फैक्ट्री लगाने में बहुत आक्रामक विरोध का सामना करना पड़ा, हमें लगा कि विपक्ष जायज बात को समझेगी और हमें पर्याप्त भूमि मिल सकेगी ताकि मुख्य प्लांट और सहायक इकाइयाँ एक साथ लगाई जा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हम हमेशा पुलिस की सुरक्षा में काम नहीं करना चाहते थे."

उन्होंने कहा कि वे पश्चिम बंगाल से नैनो के संयंत्र को हटा रहे हैं लेकिन भविष्य में राज्य में पूंजी निवेश करने पर विचार कर सकते हैं.

टाटा ने कहा, "मैं इस राज्य की बौद्धिक संपदा का बहुत सम्मान करता हूँ लेकिन यहाँ बदलाव की ज़रूरत है."

पश्चिम बंगाल सरकार ने दो वर्ष पहले नैनो परियोजना के लिए 100 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया था लेकिन किसानों विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में ज़मीन वापस माँगना शुरू कर दिया.

दस हज़ार से अधिक किसान मुआवज़ा लेकर अपनी ज़मीन देने को तैयार थे लेकिन दो हज़ार किसान किसी हालत में अपनी ज़मीन नहीं छोड़ना चाहते थे.

टाटा के कर्मचारियों और इंजीनियरों पर कई बार हमले हुए जिसके बाद वहाँ इस महीने के शुरू में कामकाज बंद कर दिया गया.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने मामले में मध्यस्थता करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी.

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