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'आम आदमी को अपने से लगते थे शास्त्रीजी'

By मोहनलाल शर्मा
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लालबहादुर शास्त्री ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया था
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जन्मशताब्दी मनाई जा रही है. पढ़िए उनके क़रीबी रहे कुलदीप नैयर के विचार.

पत्रकार और राज्यसभा के पूर्व सदस्य कुलदीप नैयर ने शास्त्रीजी के साथ काम किया और उनको बेहद नज़दीक से देखा.

वे मानते हैं कि आमआदमी को लगता था कि लालबहादुर शास्त्री उनके अपने हैं जबकि जवाहरलाल नेहरु से एक फ़ासला था. वे आम लोगों की ज़्यादा चिंता किया करते थे.

नैयर का मानना है कि पाकिस्तान से संबंध सुधारना शास्त्रीजी की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर था.

प्रस्तुत है कुलदीप नैयर से बातचीत के प्रमुख अंश -

सवाल - आपकी नज़र में लालबहादुर शास्त्री जी का व्यक्तित्व कैसा था?

कुलदीप नैयर - वो एक आम आदमी की तरह एक सीधे-सादे भारतीय थे. लिबास में ही नहीं, बल्कि बातों में भी सादा और सरल व्यक्तित्व था उनका. उनके गृहमंत्री बनने के बाद और फिर प्रधानमंत्री बनने के बाद लंबे समय तक मैंने उनके साथ काम किया था.

उनके व्यक्तित्व में कोई चालाकी वाली बात नहीं थी. दिल में बस यही था कि देश के लिए कुछ करूँ.

सवाल - क्या आपको नहीं लगता कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कम समय मिला?

जवाब - उनके कार्यकाल में 1965 की लड़ाई सबसे प्रमुख थी. उसके बाद 1966 में उनका देहांत ही हो गया. मुझे याद है कि उनकी मृत्यु रात 12 बजे के करीब हुई. करीब दो बजे वहाँ पाकिस्तान के जनरल अयूब आए.

तब जनरल अयूब ने मुझसे कहा था, "अगर शास्त्रीजी ज़िंदा रहते तो कश्मीर समस्या का हल निकल सकता था क्योंकि वो इसको लेकर ख़ासे गंभीर थे."

सवाल - क्या ताशकंद समझौते के दौरान उनपर काफ़ी मानसिक दबाव था?

जवाब - रात में तीन-तीन बजे तक बैठकें होती थीं. कुशिगन और गुरमीक आते रहते थे. शास्त्री जी चाहते थे कि आगे से कभी लड़ाई न हो. वो चाहते थे कि मसले अमन से तय हों, लड़ाई से नहीं. लेकिन जनरल अयूब ऐसा कोई वादा नहीं कर रहे थे.

प्रधानमंत्री कुशिगन ने कहा कि इस मसले को यूएन में दे दीजिए पर शास्त्री जी ने कहा कि मेरे रहते तो ऐसा नहीं होगा. जो संधिपत्र आया, उसमें भी इसका जिक्र नहीं था. तब शास्त्री जी ने जनरल अयूब को हाथ से ही लिखवाया-"विदाउट रिज़ार्टिंग टू आर्म्स".

सवाल - जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद कांग्रेस में एक रिक्तता थी. इस रिक्तता को भरने के लिए क्या लालबहादुर शास्त्री उचित पात्र थे?

जवाब - कांग्रेस के तमाम बड़े नेता, कामराज, संजीव रेड्डी, अतुल्य घोष आदि चाहते थे कि नेहरू जी के बाद शास्त्री जी ही कमान संभालें पर शास्त्री जी चाहते थे कि पार्टी में मतभेद की जगह एक आम सहमति के साथ चला जाए.

शास्त्री जी चाहते थे कि सभी लोग जयप्रकाश को अपना नेता मान लें और अगर जयप्रकाश के नाम पर आम सहमति न बने तो इंदिरा को ही नेता मान लें पर मोरारजी इससे सहमत नहीं थे. चुनाव हुए और शास्त्रीजी नेता चुन लिए गए. मोरारजी हार गए.

सवाल - कोई ख़ास घटना जो आपको बार बार उनकी याद दिलाती हो?

जवाब - मुझे याद है कि जब वो मंत्री नहीं रहे तो सवाल यह भी था कि कहाँ से गुज़ारा चलेगा. तब मैंने उनसे लेख लिखने के लिए कहा.

वो पहला लेख उन्होंने लाला लाजपत राय पर लिखा जो हिंदू, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और अमृत बाज़ार पत्रिका में प्रकाशित हुआ. हर लेख के लिए उन्हें पाँच-पाँच सौ रूपये मिले. इस तरह दो हज़ार रूपये मिल गए. फिर दूसरा लेख जवाहरलाल नेहरू पर लिखा लेकिन तीसरे सप्ताह में ही उन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंप दिया गया.

सवाल - भारतीय राजनीति में उनका स्थान नेहरू के समकक्ष माना जाए?

जवाब - उनका कद नेहरू के बराबर तो नहीं कह सकते क्योंकि उनको इतना समय कहाँ मिला. कुल डेढ़ साल का कार्यकाल था उनका. नेहरू ने देश की विदेश नीति, राष्ट्रीय नीति, आर्थिक नीति बनाई. शास्त्री उसमें सहयोग करना चाहते थे.

वो यह ज़्यादा सोचते थे कि क्या चीज़ें उस रूप में हैं जैसा कि गाँधी या नेहरू चाहते थे.

वो मानते थे कि गाँधी की नीतियों से ही यह देश आगे बढ़ेगा. नेहरू थोड़ा उद्योगों की तरह झुकाव रखते थे जबकि शास्त्री को लगता था कि कृषि को ज़्यादा महत्व देना चाहिए. सबसे ख़ास चीज़ यह थी कि हर एक को लगता था कि शास्त्री जी अपने हैं जबकि नेहरू से लोग थोड़ा फ़ासला महसूस करते थे.

सवाल - शास्त्री जी के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल को आप किस तरह से द्खते हैं?

जवाब - आर्थिक रूप से देखें तो शास्त्री ने कहा कि पिछले कामों का पुनरावलोकन हो. उनका ज़मीन से ज़्यादा जुड़ाव था इसलिए उन्हें लगता था कि रोज़मर्रा की चीज़ों के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं होनी चाहिए.

तीसरी सबसे महत्वपूर्ण कोशिश भारत-पाक संबंधों को सुधारने की दिशा में उनके द्वारा किया गया प्रयास था. वो मानते थे कि चाहे किसी अन्य देश से संबंध ठीक न हों, पर पाकिस्तान से संबंध ज़रूर अच्छे होने चाहिए.

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