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परमाणु करार को सीनेट की मंजूरी, बुश के हस्ताक्षर का इंतजार (लीड-3)

By Staff
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वाशिंगटन/न्यूयार्क, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच दोबारा परमाणु व्यापार की अनुमति देने वाले असैन्य परमाणु करार को सीनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही इसके रास्ते की अंतिम बाधा खत्म हो गई है। समझौते के पक्ष में 86 और विपक्ष में 13 मत पड़े। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने संबंधित विधेयक को पहले ही पारित कर दिया था।

वाशिंगटन/न्यूयार्क, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच दोबारा परमाणु व्यापार की अनुमति देने वाले असैन्य परमाणु करार को सीनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही इसके रास्ते की अंतिम बाधा खत्म हो गई है। समझौते के पक्ष में 86 और विपक्ष में 13 मत पड़े। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने संबंधित विधेयक को पहले ही पारित कर दिया था।

कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स और सीनेट से करार को मिली मंजूरी का राष्ट्रपति बुश ने स्वागत किया है वहीं विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस ने कहा है कि भारत अगर भविष्य में परमाणु परीक्षण करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उधर, भारतीय मूल के अमेरिकियों और संगठनों ने इसे एक ऐतिहासिक घटना करार दिया है।

राइस और भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शनिवार को नई दिल्ली में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। सीनेट ने करार से संबंधित विधेयक को अमेरिकी समय के अनुसार बुधवार रात 8.49 बजे (भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 6.19 बजे) मंजूरी दी। अब विधेयक पर राष्ट्रपति बुश के हस्ताक्षर का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों उम्मीदवारों बराक ओबामा और जान मैक्के न ने करार के पक्ष में मतदान किया। विधेयक को पारित करने से पहले सदन ने दो डेमोक्रेट सदस्यों ब्रायन डोर्गन और जैफ बिंगमैन द्वारा प्रस्तावित 'गंभीर संशोधनों' को खाारिज कर दिया।

सीनेट ने बुधवार सुबह करार पर बहस शुरू की थी। विदेश मंत्री राइस ने सीनेट में बहुमत के नेता हैरी रीड को एक पत्र लिखकर कहा था कि बुश प्रशासन बिना किसी संशोधन के समझौते को पारित करना चाहता है।

यद्यपि, उन्होंने पत्र में आश्वस्त किया कि भारत द्वारा भविष्य में परमाणु परीक्षण किए जाने के 'बेहद गंभीर परिणाम' होंगे और उसके साथ सहयोग खत्म करने के अलावा उस पर अन्य प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

राइस ने लिखा, "मैं समझती हूं कि कुछ अन्य सीनेटरों के मन में भी इस तरह के प्रश्न हैं कि भारत के परमाणु परीक्षण करने पर हमारा क्या रुख होगा। मुझे लगता है कि भारत सरकार परीक्षणों पर लगाई गई स्वैच्छिक रोक की अपनी घोषणा पर कायम रहेगी।"

राइस ने कहा कि भारत ने 2005 में संयुक्त राष्ट्र में ऐसी घोषणा की थी और उसने सितम्बर 2008 में अपनी बात दोहराई।

उधर, राष्ट्रपति बुश ने करार को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों की मंजूरी का स्वागत किया है। बुश ने कहा कि इससे वैश्विक परमाणु अप्रसार के प्रयास मजबूत होंगे, पर्यावरण का संरक्षण होगा, नौकरियों के अवसर पैदा होंगे तथा भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों से जिम्मेदार ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।

करार को सीनेट की मंजूरी मिलने के कुछ ही देर बाद बुश ने बयान जारी कर कहा कि वे संबंधित विधेयक पर हस्ताक्षर करने और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने की प्रतीक्षा में हैं।

बुश ने कहा, "अमेरिका-भारत परमाणु सहयोग मंजूरी एवं अप्रसार संवर्धन अधिनियम, एच.आर. 7081 को पारित करने के लिए मैं सीनेट को बधाई देता हूं।"

बुश ने कहा कि दोनों दलों को स्वीकार्य इस अहम विधेयक को तैयार करने के लिए वे विदेशी मामलों से संबद्ध सीनेट की समिति के सदस्यों की विशेष तौर पर सराहना करते हैं। उन्होंने कहा कि वे बहुमत के नेता हैरी रीड और अल्पमत के नेता मिच मैक्कॉनेल का भी आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जो सीनेट के स्थगित होने से पहले ही विधेयक को सदन में ले आए।

इस बीच न्यूयार्क में भारतीय मूल के अमेरिकियों और संगठनों ने करार को सीनेट की मंजूरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक घटना करार दिया है।

'इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस' (आईएनओसी) अमेरिका, ने एक वक्तव्य में कहा कि वह इस ऐतिहासिक समझौते को उत्सव के रूप में मना रहे हैं। वक्तव्य में इस समझौते के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए स्थानीय भारतीय समुदाय का आभार भी व्यक्त किया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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