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    ब्रिटेन में बहस के बीच खुला पहला हिंदू स्कूल

    By अपूर्व कृष्ण
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    कृष्ण अवंति प्राइमरी स्कूल है जिसमें पहले सत्र मे 30 छात्रों का दाख़िला करवाया गया है
    ब्रिटेन में लंबी बहस के बाद आख़िरकार देश का पहला हिंदू स्कूल खुल गया है. स्कूल को लेकर स्वयं हिंदू समुदाय की ओर से भी सवाल उठे हैं.

    लंदन के हैरो इलाक़े में खुले इस स्कूल के नाम की कहानी ये है कि देवकीपुत्र-यशोदानंदन कृष्ण-कन्हैया जब छात्रावस्था में पहुँचे तो उन्हें भेजा गया अवंतिपुर - ऋषि संदीपन के आश्रम. तो कृष्ण-अवन्ति का मतलब हुआ कृष्ण का गुरूकुल या कृष्ण का विद्यालय.

    द्वापर युग में अवंतिपुर से पढ़कर निकले उस छात्र ने बड़े होकर कुरूक्षेत्र की युद्धभूमि में गीता के रूप में समस्त मानवता को ऐसा ज्ञान दिया जो जीवन रहस्य कहलाता है - बिना फल की चिंता किए कर्म रहते रहने का ज्ञान.

    लेकिन ब्रिटेन के पहले हिंदू स्कूल - कृष्ण अवंति स्कूल -- से निकले नौनिहाल जिस जीवन दर्शन के सहारे कल का भविष्य सँवारेंगे, उसकी दृष्टि व्यापक होगी या संकीर्ण इसपर बहस हो रही है.

    शिक्षा को धर्म से जोड़े जाने को लेकर धर्मनिरपेक्षतावादी समूह तो सवाल उठा ही रहे थे, स्वयं हिंदू समुदाय ने भी कुछ आपत्तियाँ जताई थीं.

    ब्रिटेन में वर्ष 2001 की जनगणना के हिसाब से देश में साढ़े पाँच लाख से अधिक हिंदू रहते हैं. मगर हिंदू संगठनों के अनुसार अभी ये संख्या लगभग आठ लाख पहुँच गई होगी.

    धर्मनिरपेक्षता

    सरकार ने ख़ुद ही कुछ वर्ष पहले एक शोध करवाया था जिसमें पाया गया कि समाज में समरसता लाने का सर्वश्रेष्ࢠ रास्ता ये है कि स्कूलों में हर धर्म के-हर नस्ल के बच्चे पढ़ाई करें, और मुझे नहीं लगता कि इस स्कूल से ऐसा कुछ होने जा रहा है.
    हिंदू स्कूल के गवर्नर बोर्ड के सदस्य डॉक्टर संजीव अग्रवाल का कहना है कि हिंदू समुदाय के लोग एक लंबे समय से इस तरह के स्कूल की आवश्यकता महसूस कर रहे थे.

    संजीव कहते हैं,"ये एक ऐसा स्कूल है जहाँ राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ-साथ हिंदू धर्म के बारे में भी पढ़ाया जाएगा ताकि जो छात्र हों वे ब्रिटिश नागरिक तो हों ही, उन्हें इसके साथ ये भी लगे कि उसकी एक पहचान ये भी है कि वह हिंदू है."

    लेकिन कई लोगों का मत है कि इस तरह के धर्माधारित विद्यालयों से ब्रिटेन का धर्मनिरपेक्ष चरित्र प्रभावित होता है.

    एक करोड़ पाउंड की लागत वाले स्कूल के भवन की आधारशिला रखी जा चुकी है

    ब्रिटेन स्थित नेशनल सेक्यूलर सोसायटी के प्रवक्ता एलेस्टर मैक्बे कहते हैं," सरकार ने ख़ुद ही कुछ वर्ष पहले एक शोध करवाया था जिसमें पाया गया कि समाज में समरसता लाने का सर्वश्रेष्ठ रास्ता ये है कि स्कूलों में हर धर्म के-हर नस्ल के बच्चे पढ़ाई करें, और मुझे नहीं लगता कि इस स्कूल से ऐसा कुछ होने जा रहा है."

    मगर इस तर्क के साथ समस्या ये है कि ब्रिटेन में ऐसे धर्माधारित स्कूलों का रिवाज़ पहले से ही चला आ रहा है जिन्हें यहाँ फ़ेथ स्कूल्स कहा जाता है.

    यहाँ लगभग 6850 धर्माधारित स्कूल हैं जिनमें अधिकाँश स्कूल ईसाई स्कूल हैं. इसके अलावा इस्लाम, सिख, यहूदी और दूसरे धर्मों के भी विशेष स्कूल हैं.

    वैसे हिदू संगठनों के अपने स्कूल यहाँ और भी हैं, जैसे स्वामीनारायण मंदिर का स्कूल या हरे कृष्ण संप्रदाय का स्कूल.

    लेकिन कृष्ण अवंति स्कूल इस मायने में अलग है कि ये यहाँ का पहला ऐसा स्कूल है जो सरकारी स्कूल है, जहाँ बच्चों को पढ़ाई के लिए फ़ीस नहीं देनी पड़ती, सारा ख़र्च सरकार उठाती है.

    कठिन शर्तें

    ये आवश्यक नहीं. इसके अलावा मंदिर या संस्था से जुड़े होने का भी कोई मतलब नहीं. मैं अपने हिंदू संस्कारों को कर्म में उतारते हुए समाज के लिए कार्य करते हुए, बिना एक दिन भी मंदिर जाए हुए, एक आदर्श हिंदू हो सकता हूँ
    हिंदू स्कूल को लेकर स्वयं हिंदू समुदाय में मतभेद हैं क्योंकि स्कूल में दाखिले के लिए दो शर्तें लगाई गई थीं -- एक तो ये कि बच्चे शाकाहारी परिवार के हों, दूसरा ये कि उनके पास किसी संस्था या मंदिर से मिला ये प्रमाणपत्र हो कि वे हिंदू हैं.

    ब्रिटेन के प्रतिष्ठित स्कूल -- ईटन कॉलेज - में हिंदू धर्म पढ़ानेवाले पहले शिक्षक डॉक्टर जय लखानी कहते हैं कि ये दोनों ही शर्तें एक झटके में इसे एक संकीर्ण दायरे वाला स्कूल बना डालती हैं.

    डॉक्टर लखानी ने कहा,"ऐसे हिंदुओं की संख्या बहुत बड़ी है, जो शाकाहारी हों, ये आवश्यक नहीं. इसके अलावा मंदिर या संस्था से जुड़े होने का भी कोई मतलब नहीं. मैं अपने हिंदू संस्कारों को कर्म में उतारते हुए समाज के लिए कार्य करते हुए, बिना एक दिन भी मंदिर जाए हुए, एक आदर्श हिंदू हो सकता हूँ."

    फ़िलहाल विवाद के बाद हिंदू स्कूल में दाखिले के लिए शाकाहारी होने की शर्त तो हटा दी गई है, लेकिन सर्टिफ़िकेट लाना अभी भी ज़रूरी है.

    स्कूल के गवर्नर बोर्ड के सदस्य डॉक्टर संजीव अग्रवाल अपनी मजबूरी बताते हुए कहते हैं,"ये तकनीकी मामला है जिसे आप इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि अगर आप ईसाई स्कूल में पढ़ना चाहते हैं तो आपको चर्च से एक प्रमाणपत्र लेना होता है, इसी तरह अगर ये हिंदू स्कूल है और हिंदू छात्र पढ़ेंगे तो वो सिद्ध कैसे होगा, इसलिए ही प्रमाणपत्र ज़रूरी किया गया."

    भ्रामक नाम

    सरकार के सामने अगर आप कोई प्रस्ताव रखते हैं, तो वो ईसाई स्कूल, यहूदी स्कूल, मुस्लिम स्कूल - इस आधार पर धर्माधारित स्कूलों के बारे में कोई सोच तय करती है. ऐसे में अपने प्रस्ताव को हिंदू स्कूल के रूप में ही पेश किया जा सकता था.
    डॉक्टर जय लखानी इस स्कूल को हिंदू स्कूल कहे जाने को भी सही नहीं मानते. उनका कहना है कि ये स्कूल हरे कृष्ण संप्रदाय - इंटरनेशन सोसायटी फ़ॉर कृष्णा कॉन्सशनेस - इस्कॉन की पहल और सहयोग से चल रहा है और ये सारे हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता और ऐसे में इसे हिंदू स्कूल कहा जाना भ्रामक होगा.

    डॉक्टर लखानी कहते हैं," अगर ये स्कूल एक ख़ास तरह के मत और ख़ास विचारधारा को बढ़ावा देता है तो ये एक तरह से अन्यायपूर्ण होगा क्योंकि हिंदुत्व की सोच, उसका दायरा तो बहुत व्यापक है. इसलिए ये बेहतर होता अगर ये स्पष्ट कर दिया जाता कि ये हिंदू स्कूल नहीं, इस्कॉन का स्कूल है या इस्कॉन से प्रेरित स्कूल है, तो शायद ये सही होता."

    प्रबंधकों का कहना है कि हर वर्ष स्कूल में एक कक्षा बढ़ा दी जाएगी

    लेकिन स्कूल प्रबंधन इसके पीछे भी तकनीकी कारण बताते हुए अपनी लाचारी दिखाता है.

    डॉक्टर संजीव अग्रवाल कहते हैं,"सरकार के सामने अगर आप कोई प्रस्ताव रखते हैं, तो वो ईसाई स्कूल, यहूदी स्कूल, मुस्लिम स्कूल - इस आधार पर धर्माधारित स्कूलों के बारे में कोई सोच तय करती है. ऐसे में अपने प्रस्ताव को हिंदू स्कूल के रूप में ही पेश किया जा सकता था."

    फ़िलहाल तमाम बहस के बीच 23 सितंबर 2008 को ब्रिटेन का पहला हिंदू स्कूल खुल गया. ये प्राइमरी स्कूल है और अभी पहले सत्र के 30 छात्रों ने पढ़ाई शुरू की है.

    अभी ये प्राइमरी स्कूल है. स्कूल में हर वर्ष एक नई कक्षा जुड़ती जाएगी. योजना है कि वर्ष 2016 तक स्कूल में छठी कक्षा तक पढ़ाई होने लगेगी और तब इस स्कूल में 210 छात्र पढ़ाई कर रहे होंगे.

    पहली कक्षा अभी अभी अस्थायी तौर पर एक दूसरे स्कूल में चलाई जा रही है. स्कूल का असल भवन मंदिरनुमा है जिसके निर्माण पर एक करोड़ पाउंड यानी लगभग 80-85 करोड़ रूपए ख़र्च किए जाएँगे.

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