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परमाणु शस्त्रों पर रोक लगे: मनमोहन

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manmohan singh
संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर: भारत ने आज कहा कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय असैन्य परमाणु सहयोग के दरवाजे खुलना परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में भारत के बेदाग रिकार्ड और परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति उसकी दीर्घकालिक वचनबद्धता की पुष्टि करता है।

साथ ही इसका वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में परमाणु शस्त्रों के विकास, उत्पादन, भंडारण और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता करने के भारत के प्रस्ताव को दोहराते हुए कहा कि परमाणु शस्त्रों को एक तय समय सीमा के भीतर पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा "भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय असैन्य परमाणु सहयोग के दरवाजे खुलने का दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इससे जलवायु परिवर्तन की समस्या दूर करने में भी मदद मिलेगी"।

यह परमाणु अप्रसार में भारत के बेदाग रिकार्ड और दुनिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के हमारे दीर्घकालिक संकल्प की पुष्टि करता है।पड़ोसी देश पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दों को बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ. सिंह ने नेपाल और भूटान में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकारों के सत्ता में आने का स्वागत किया और सतत विकास तथा गरीबी उन्मूलन की चुनौतियों से निपटने के लिए इन देशों के साथ सहयोग बढाने की इच्छा जताई।

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