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परमाणु समझौते पर मत विभाजन टला

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बुश चाहते हैं कि उनके ही कार्यकाल में यह समझौता लागू हो जाए
एक प्रमुख डेमोक्रैट सांसद की आपत्ति के बाद भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर मत विभाजन एक और दिन के लिए टल गया है. अब यह शनिवार को होगा.
अब इस पर मत विभाजन शनिवार को होने की संभावना है और जिस नियम के तहत मतदान होगा उसमें इसे पारित करवाने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रुरत होगी.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कोई दिक़्कत आने के आसार नहीं दिख रहे हैं. भारत-अमरीका परमाणु समझौता के लिए यह आख़िरी पड़ाव है और यदि अमरीकी संसद इसे मंज़ूरी दे देती है तो फिर इसे लागू किया जा सकता है.

दोनों ही देश अपने-अपने स्तर पर इसे यथाशीघ्र पारित करवाने के लिए कोशिश कर रहे हैं. भारत-अमरीका परमाणु समझौते के संबंध में विधेयक को गुरुवार को अमरीकी प्रतिनिधि सभा में संशोधनों के साथ पेश किया गया था.

सीनेट की समिति के मंज़ूर विधेयक के संस्करण के अनुसार भारत के परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में परमाणु आपूर्तिकर्ता देश परमाणु उपकरण, सामग्री और तकनीक के हस्तांतरण पर रोक लग जाएगी. इस संबंध में जब भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन का कहना था कि भारत को 123 समझौते से मतलब है, बाकी ये अमरीका का आंतरिक मामला है.

बहस और आपत्ति

शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में इस विधेयक पर जमकर बहस हुई. लेकिन मत विभाजन से पहले डेमोक्रैट सांसद एडवर्ड मर्की ने आपत्ति लगा दी कि मत विभाजन रिकॉर्ड पर होना चाहिए.

भारत इस असैन्य परमाणु समझौते को दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम बता रहा है. अमरीकी संसद के नियमों के अनुसार इसका मतलब यह है कि अब इस विधेयक पर मत डालने वाले हर सांसद का मत रिकॉर्ड किया जाएगा कि किसने समर्थन में वोट दिया और किसने विरोध में.

अगर रिकॉर्ड में वोट नहीं डालना होता तो पक्ष और विपक्ष के वोट गिनकर ही काम चल जाता. वैसे तो बहुत से डेमौक्रैट सांसद इसका विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि भारत के साथ इस तरह का समझौता करने के बाद पाकिस्तान, ईरान और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों की होड़ से रोकना संभव नहीं होगा.

एडवर्ड मर्की का कहना था कि पाकिस्तान में एक्यू ख़ान जैसे लोग रहते हैं और वहाँ अल-क़ायदा भी है. यदि भारत के साथ समझौता होने के बाद पाकिस्तान भी परमाणु होड़ में शामिल हो जाएगा तो इससे दुनिया के लिए ख़तरा पैदा हो जाएगा.

लेकिन इसका समर्थन करने वाले सांसदों का कहना है कि यह समझौता इसलिए अच्छा है क्योंकि इसके ज़रिए भारत-अमरीका के रिश्ते मज़बूत होंगे और भारत परमाणु अप्रसार के दायरे में आ जाएगा.

उनका तर्क है कि ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इसके बाद भारत के दो तिहाई परमाणु संयंत्र अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में आ जाएगा.
प्रतिनिधि सभा से पारित करने के बाद इस विधेयक को सीनेट में भेजा जाएगा और वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करेंगे.

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