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हाईकोर्ट ने ओकारेश्वर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से रोका

By Staff
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भोपाल, 26 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय ने नर्मदा नदी पर बने ओकारेश्वर बांध की ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया है। न्यायालय का कहना है कि पहले विस्थापितों का पुनर्वास किया जाए और लंबित शिकायतों का निराकरण हो उसके बाद ही बांध की ऊंचाई बढ़ाने की बात कही जाए।

मध्यप्रदेश सरकार व नर्मदा हाइड्रोलिक डेवलपमेंट कार्पोरेशन और नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से दायर की गई याचिकाओं की मुख्य न्यायाधीश ए़ क़े पटनायक और न्यायाधीश अजीत सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई की। नर्मदा बचाओ आंदोलन की चितरूपा पालित ने बताया है कि एऩ एच़ डी़ सी़ तथा मध्यप्रदेश सरकार ओकारेश्वर बांध की ऊंचाई 189 से बढ़ाकर 193 मीटर तक पानी भरना चाहती है। इससे कई गांव के डूबने की आशंका है।

न्यायालय में नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद लंबित शिकायतों का नर्मदा शिकायत निवारण प्राधिकरण की ओर से समाधान नहीं किया गया। न्यायालय ने पूर्व में 31 मार्च तक आई शिकायतों का निराकरण करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद सिर्फ 295 शिकायतों का ही निराकरण हो पाया है और 135 शिकायतों की सुनवाई चल रही है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की सिलवी का कहना है कि प्रदेश सरकार वाकई में न तो बांध की ऊंचाई बढ़ाकर प्रदेश की जनता को लाभ दिलाना चाहती है और न ही पीड़ितों का पुनर्वास करने में रुचि दिखा रही है। इसी का नतीजा है कि 4 हजार शिकायतें लंबित हैं और उनका समाधान नहीं हो पा रहा है। इन्हीं स्थितियों के मद्देनजर न्यायालय ने बांध की ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है साथ ही निर्देश दिया है कि शिकायतों का शीघ्र निराकरण किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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