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राजस्थान में आगामी चुनाव की तैयारियाँ

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वर्ष 2003 में हुए चुनावों के बाद वसुंधरा राजे राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी
राजस्थान में इस वर्ष के आख़िर में होने वाले विधानसभा के चुनावों के लिए सत्तारुढ़ बीजेपी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को आगे किया है.

भाजपा का कहना है कि यदि वो सत्ता में आई तो वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री बनेंगी. लेकिन विपक्षी कांग्रेस पार्टी अभी किसी नेता को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं कर रही है.

इस बार बहुजन समाज पार्टी भी पूरी ताक़त के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और उसने अपने डेढ़ सौ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया है.

सत्तारूढ़ भाजपा ने पाँच साल में अपनी सरकार के काम काज और विकास को मुद्दा बना कर चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की है. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि वो इस सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्ट्राचार, फ़िज़ूलखर्ची और सामाजिक तानेबाने को छिन्न-भिन्न करने जैसे मुद्दों को जनता के सामने रख कर वोट माँगेगी.

राज्य में विधानसभा की 200 सीटें हैं. पिछली बार भाजपा ने शानदार प्रदर्शन कर इनमें से 120 सीटों पर कब्ज़ा कर लिया था जबकि कांग्रेस को महज़ 56 सीटों पर संतोष करना पड़ा था.

मार्क्सवादी पार्टी ने एक, बीएसपी ने दो, लोक जनशक्ति ने एक, जनता दल ने दो और निर्दलियों ने 13 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी.

ग्वालियर के पूर्व राज परिवार की बेटी बंसुधरा राजे वर्ष 2003 में हुए चुनावों के बाद राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी और पूरे पाँच साल पार्टी में सर्व शक्तिमान नेता की तरह राजपाट चलाया. लेकिन इन पाँच वर्षों में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री का विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा.

आंदोलन

इन पाँच वर्षों में ऐसे अनेक अवसर आए जब जनता और पुलिस के बीच संग्राम हुआ और कई लोग गोलीबारी में मारे गए. विपक्ष की माने तो राज्य में पुलिस फ़ायरिंग की कोई 16 घटनाएँ हुई और 90 से ज़्यादा लोग इससे मरे.

राज्य के सीमावर्ती ज़िलों में सिंचाई का पानी माँग रहे किसानों और पुलिस में हुई भीड़ंत में छह लोगों की जान गई, वहीं टोंक ज़िले में पानी माँग रहे किसानों पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी और पाँच किसान मारे गए.

राजस्थान ने अपने इतिहास का कदाचित सबसे गंभीर जातिगत तनाव देखा जब गुर्जर सड़कों पर निकले और बिरादरी के लिए जनजाति का दर्जा माँगने लगे. रेल रुकी, सड़कें जाम हुई. जनजीवन पटरी से उतरा.

योजना आयोग ने भी रोज़गार गारंटी में काम काज के लिए राजस्थान की तारीफ़ की है.
पुलिस और गुर्जर आंदोलनकारियों का मुक़ाबला हुआ. इसमें क़रीब 70 लोगों की जान गई.

आदिवासी बहुल दक्षिण राजस्थान में जैन समुदाय और आदिवासियों में संघर्ष हुआ. इस संघर्ष में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक आदिवासी मारा गया.

मुख्यमंत्री ने सदा राज्य को एक साझे परिवार के रुप में देखा और लोगों से मिलजुल कर रहने की सीख दी. लेकिन विपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य को जातीय दंगल में बदल दिया है.

मुख्यमंत्री ने जयपुर के सांगनेर में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए हज हाउस के निर्माण का इरादा बनाया तो उनके ही मंत्री घनश्याम तिवारी विरोध में खड़े हो गए.

हज हाउस ने जैसे पूरे संघ परिवार को बाँट दिया. दुनिया के हिंदुओं में व्यापक एकता के लिए काम कर रही विश्व हिंदू परिषद भी दो भागों में बंट गई.

विरोधी कुछ भी कहते रहे मुख्यमंत्री के समर्थक उनमें एक देवी की तस्वीर पाते हैं. लेकिन जोधपुर में एक पुजारी और भाजपा कार्यकर्ता हेमंत बोहरा ने जब मुख्यमंत्री को देवी अन्नपूर्णा के रूप में कलैंडर में प्रकाशित किया तो उनकी पार्टी में ही विवाद उठ खड़ा हुआ.

इस बार बहुजन समाज पार्टी भी पूरे ताक़त के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी है और उसने अपने डेढ़ सौ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी कर दिया है.
भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह की पत्नी शीतल कँवर ने इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया और अदालत में मुक़दमा दायर कर दिया.

वसुंधरा राजे को उस वक़्त भी निशाना गया जब एक समर्थक ने उनका मंदिर बनाने का ऐलान किया.

मुख्यमंत्री ने खादी के प्रचार के लिए मॉडलों के साथ खड़े होने पर भी गुरेज़ नहीं किया लेकिन इस पर भी उनकी आलोचना हुई.

जयपुर में दीनदयाल ट्र्स्ट के नाम पर कथित रुप से बेहद क़ीमती ज़मीन आवंटित करने पर मुख्यमंत्री को भारी विरोध का सामना करना पड़ा और आवंटन का मामला अब भी अदालत में चल रहा है.

फिर सेज़ के लिए जयपुर के नज़दीक ज़मीन आवंटित करने का मामला आया तो पार्टी का एक गुट उनके विरोध में खड़ा हो गया.

आलोचना

गुर्जर आंदोलन में कई लोगों की जान गई थी

मुख्यमंत्री को बाड़मेर में ऐसे ही विवाद का सामना करना पड़ा जब उनकी सरकार ने एक निजी कंपनी के लिए ज़मीन आवंटित की. सीमावर्ती ज़िलों में बड़े पैमाने पर ज़मीनों की बिकवाली पर बीजेपी को आलोचना का सामना करना पड़ा.

ये अलग बात है कि मुख्यमंत्री ने बड़ी मजबूती से इन सबका मुकाबला किया और पार्टी के हाई कमान ने उनका पूरा समर्थन किया.

राज्य में बड़ी तादाद में शराब की दुकानें खुलने पर भी भाजपा की भारी आलोचना हुई. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपनी एक सभा में कहा कि भाजपा सरकार बच्चों को दूध पिलाने का आह्वान कर रही है तो बच्चों के पिता के लिए शराब मुहैया करा रही है.

इस बात पर राजे सरकार ने तुरंत कहा कि ये दुकानें कांग्रेस राज्य में ही खुली थी. राज्य सरकार ने विमान ख़रीदने और मंत्रियों के लिए विलासी कारों के ख़रीदने पर भी सरकार को निंदा का सामना करना पड़ा.

हालांकि विपक्ष कोई बड़ा आंदोलन भी खड़ा नहीं कर पाया और मुख्यमंत्री ने सभी इन विवादों की परवाह नहीं की और अपना काम जारी रखा. अभी योजना आयोग ने भी रोज़गार गारंटी में काम काज के लिए राजस्थान की तारीफ़ की है.

मुख्यमंत्री ने अपनी सभाओं में कहा कि उनके शानदार विकास कार्यों की फ़ेहरिस्त इतनी लंबी है कि विपक्ष चुनाव में टिक नहीं पाएगा.

ये बारहवीं विधान सभा है जिसकी अब तक 140 बैठकें हुई हैं. ताज़ा दलगत स्थिति में भाजपापी के 123 और कांग्रेस सहित अन्य दलों के 77 विधायक हैं.

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