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    नशा की युवाओं की प्रवृति पर सभ्यता का प्रभाव!

    By Staff
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    लंदन, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति जानबूझकर या फिर अनजाने में घर कर सकती है। एक नई पुस्तक 'स्विमिंग विद क्रोकोडायल्स : द कल्चर ऑफ एक्सट्रीम ड्रिंकिंग' के अनुसार इस पर उनके देश का भी प्रभाव होता है।

    'इंटरनेशनल सेंटर फॉर अल्कोहल पॉलिसीज' (आईसीएपी) द्वारा किए गए अध्ययन पर आधारित इस पुस्तक में विश्व के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले युवाओं के नशे की आदत में समानताएं बताई गई हैं।

    शराब से युवाओं का परिचय सीधे अभिभावकों द्वारा पारिवारिक समारोहों के दौरान होता है। नशे का सेवन शुरुआत में पार्टियों और मौज-मस्ती वाले कार्यक्रमों के दौरान सामाजिक मेल-जोल बढ़ाने के मकसद से किया जाता है।

    ऑनलाइन विज्ञान समाचार सेवा 'युरेकालर्ट' के मुताबिक ब्राजील, चीन, इटली, नाइजीरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन पर किए गए अध्ययन के बाद यह नतीजा सामने आया है।

    लैनकैस्टर यूनिवर्सिटी के अपराध विशेषज्ञ और इस पुस्तक के सह-संपादक फियोना मीशम ने कहा, "दुख की बात यह है कि बहुत सारे युवा अपने देश की संरचनात्मक और सांस्कृतिक कारकों से प्रभावित होकर सिर्फ खुशी हासिल करने के मकसद से नशा करते हैं।"

    आईसीएपी के जन स्वास्थ्य उपाध्यक्ष मर्जाना मारटिनिक ने कहा, "बहुत ज्यादा पीने की इस आदत को हमें बदलने की जरूरत है। हमें इटली और स्पेन जैसे देशों की ओर देखने की जरूरत है, जहां परिवार में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा शराब पीना आम है।"

    इन सब बातों को ध्यान में रखकर सरकार, जन स्वास्थ्य समुदाय, शराब उद्योग, आपराधिक न्याय प्रणाली और सभ्य समाज को एक साथ मिलकर युवाओं की बहुत ज्यादा नशा करने की आदत को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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